सबरीमाला सोना विवाद पर केरल सरकार का पलटवार: मंत्री बोले—अयोध्या मंदिर से जुड़े आरोपों पर भी जवाब दें आलोचक
केरल के देवस्वोम एवं स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने सबरीमाला मंदिर से कथित रूप से सोना गायब होने के मामले में राज्य सरकार की आलोचना करने वालों पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि जो लोग इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहे हैं, उन्हें अयोध्या राम मंदिर से जुड़े कथित फंड और सोना अनियमितता के आरोपों पर भी अपनी राय स्पष्ट करनी चाहिए।
रविवार को पल्स पोलियो अभियान के उद्घाटन के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुरलीधरन ने किसी राजनीतिक दल का नाम लिए बिना कहा कि कुछ लोग लगातार केवल सबरीमाला मामले को लेकर सरकार पर हमला कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करती है, लेकिन अयोध्या से भी करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। ऐसे में वहां से जुड़े कथित मामलों पर भी समान गंभीरता से सवाल उठाए जाने चाहिए।
मंत्री ने कहा कि सबरीमाला मामले में राज्य सरकार विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी। भगवान अयप्पा मंदिर की कलाकृतियों से कथित रूप से सोना गायब होने से जुड़े दो मामलों की जांच कर रही एसआईटी सोमवार को केरल हाई कोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश कर सकती है।
इस बीच, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सबरीमाला सोना मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जांच सीबीआई को नहीं सौंपी गई तो भाजपा राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करेगी।
मुरलीधरन ने राज्य सरकार के बजट में कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों पर टैक्स घटाने के प्रस्ताव का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव वित्त विधेयक का हिस्सा है और विधानसभा से पारित होने के बाद सरकार अंतिम निर्णय लेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि टैक्स में राहत केवल कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों के लिए प्रस्तावित है, जबकि अधिक अल्कोहल वाले पेयों पर कोई छूट नहीं दी जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में केरल में पूर्ण शराबबंदी व्यावहारिक नहीं है और सरकार का उद्देश्य शराब से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों को कम करना है।
स्वास्थ्य मंत्री ने राज्य में डेंगू और शिगेला संक्रमण की स्थिति पर भी राहत भरी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दोनों बीमारियों के मामलों में कमी आई है और पिछले कुछ दिनों में शिगेला संक्रमण से किसी की मृत्यु नहीं हुई है। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि लगातार बारिश के दौरान यदि सार्वजनिक स्थानों से कचरे का समय पर निस्तारण नहीं किया गया तो संक्रामक रोगों का खतरा फिर बढ़ सकता है।
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