इंसानियत की मिसाल, कछौना चेयरमैन पंकज शुक्ला ने निभाया पिता का फर्ज, नम आंखों से किया बेटी सान्वी का कन्यादान
कछौना, हरदोई (आरएनआई) संकट के समय में किसी को ढांढस बंधाना आसान है, लेकिन किसी के आंसू पोंछकर उसके परिवार का सहारा बन जाना ही सच्ची इंसानियत है। उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले की नगर पंचायत कछौना पतसेनी से एक ऐसा ही दिल छू लेने वाला मामला सामने आया है, जिसे सुनकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। यहाँ के चेयरमैन राधारमण शुक्ला उर्फ पंकज शुक्ला ने एक बेसहारा बेटी की शादी का पूरा खर्च उठाकर और खुद कन्यादान कर समाज के सामने मानवता का एक अनुपम उदाहरण पेश किया है। कछौना कस्बे के रहने वाले महेंद्र उर्फ गुड्डू के घर में उनकी बेटी सान्वी की शादी की तैयारियां जोर-शोर से चल रही थीं। पूरा परिवार शादी की खुशियों में मग्न था कि बीती 9 मई को एक दर्दनाक हादसे ने सब कुछ बदल दिया। करंट लगने से महेंद्र की अचानक मौत हो गई। पिता के साए के उठते ही शादी की खुशियां मातम में बदल गईं और परिवार के सामने बेटी के भविष्य तथा शादी को लेकर चिंता का पहाड़ टूट पड़ा।महेंद्र की मौत के बाद शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। उसी भीड़ में कछौना के नगर अध्यक्ष राधारमण शुक्ला उर्फ पंकज शुक्ला भी मौजूद थे। उन्होंने परिवार को केवल ढांढस ही नहीं बंधाया, बल्कि आगे बढ़कर बेटी सान्वी की शादी की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेने का संकल्प किया। उस भावुक क्षण में पंकज शुक्ला ने कहा था— "महेंद्र भले ही दुनिया से चले गए हों, लेकिन वह सान्वी को बेसहारा नहीं छोड़ गए हैं। जब तक मेरी सांसें चल रही हैं, सान्वी की शादी में एक तिनके की कमी नहीं होने दूंगा। सान्वी के हाथ पीले होंगे, धूमधाम से बारात आएगी और उस बेटी का कन्यादान मैं खुद एक पिता के मान-सम्मान के साथ कराऊंगा। चेयरमैन पंकज शुक्ला ने अपने इस संकल्प को पूरी निष्ठा के साथ निभाया। बीती 27 जून को सान्वी की शादी बेहद धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुई। पूरे मान-सम्मान के साथ बारात का स्वागत सत्कार किया गया और विवाह की सभी रस्में पूरी की गईं। नगर अध्यक्ष राधारमण शुक्ला ने खुद मंडप में बैठकर सान्वी का कन्यादान किया और एक पिता के रूप में अपने सारे दायित्वों को पूरा किया। विदाई के समय सान्वी की आंखें नम थीं। उन आंखों में जहां एक ओर अपने सगे पिता को खोने का गहरा दर्द था, वहीं दूसरी ओर चेयरमैन पंकज शुक्ला के रूप में मिले 'नए पिता' के प्रति कृतज्ञता और सम्मान का भाव भी था। पिता की कमी को दुनिया में कोई पूरा नहीं कर सकता, लेकिन पंकज शुक्ला ने संकट की इस घड़ी में संकटमोचक बनकर जो कार्य किया है, उसने यह साबित कर दिया है कि आज के दौर में भी इंसानियत पूरी तरह जिंदा है। उनके इस नेक कार्य की कछौना सहित पूरे हरदोई जिले और सोशल मीडिया पर जमकर सराहना हो रही है।
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