केंद्र ने रिफाइनरियों और उत्पादकों के लिए तय किए एलपीजी उत्पादन लक्ष्य, रिलायंस को मिला सबसे बड़ा कोटा
नई दिल्ली। भारत में रसोई गैस की बढ़ती मांग और आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने पहली बार देश की रिफाइनरियों और तेल-गैस उत्पादकों के लिए कंपनीवार एलपीजी उत्पादन लक्ष्य तय किए हैं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से जारी व्यवस्था के तहत आपूर्ति में व्यवधान की स्थिति में 21 रिफाइनरियों और अपस्ट्रीम कंपनियों को उत्पादन बढ़ाना होगा।
भारत में हर साल करीब 3.32 करोड़ टन एलपीजी की खपत होती है, जबकि घरेलू उत्पादन लगभग 1.31 करोड़ टन है। ऐसे में 64 प्रतिशत से अधिक जरूरत आयात के जरिए पूरी होती है। आयातित एलपीजी का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारत पहुंचता है।
नए ढांचे के तहत कुल संभावित एलपीजी उत्पादन क्षमता 63,810 टन प्रतिदिन निर्धारित की गई है। यह देश की रोजाना एलपीजी खपत का करीब 70 प्रतिशत है और सामान्य घरेलू उत्पादन क्षमता से काफी अधिक है। सरकार का उद्देश्य आपात स्थिति में आयात पर निर्भरता के जोखिम को कम करना और घरेलू उत्पादन को तेजी से बढ़ाना है।
रिलायंस को मिला सबसे बड़ा उत्पादन लक्ष्य
सरकार ने सबसे बड़ा एलपीजी उत्पादन लक्ष्य रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड को दिया है। गुजरात स्थित जामनगर रिफाइनरी को प्रतिदिन 18,000 टन एलपीजी उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
वहीं, निजी क्षेत्र की नयारा एनर्जी की वाडीनार रिफाइनरी के लिए प्रतिदिन 4,480 टन एलपीजी उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है।
पश्चिम एशिया संकट के बाद बढ़ी चिंता
हाल में पश्चिम एशिया में तनाव के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य से एलपीजी शिपमेंट प्रभावित होने के कारण भारत को आपूर्ति संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। उस समय सरकार ने रिफाइनरियों को पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक की कुछ धाराओं को एलपीजी उत्पादन की ओर मोड़ने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए थे।
संकट के दौरान घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाकर करीब 55,000 टन प्रतिदिन तक किया गया था। इसके अलावा औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को एलपीजी की आपूर्ति सीमित की गई थी, जबकि उपलब्धता वाले क्षेत्रों में घरेलू उपभोक्ताओं को पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया था।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)