क्या वैज्ञानिकों ने खोज लिया पांचवें आयाम का ‘पोर्टल’? डार्क मैटर की गुत्थी सुलझाने की कोशिश
वैज्ञानिकों ने पांचवें आयाम से जुड़ी एक सैद्धांतिक अवधारणा के जरिए डार्क मैटर की रहस्यमयी प्रकृति को समझाने का एक नया मॉडल पेश किया है। हालांकि इसे वास्तविक ‘पोर्टल’ की खोज नहीं माना गया है, लेकिन इस सिद्धांत ने ब्रह्मांड के छिपे हुए पदार्थ और सामान्य कणों के बीच संभावित संबंध को लेकर वैज्ञानिकों की दिलचस्पी बढ़ा दी है।
डार्क मैटर ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्यों में से एक है। वैज्ञानिकों को इसके सीधे दिखाई देने या सामान्य पदार्थ की तरह प्रकाश के साथ संपर्क करने के प्रमाण नहीं मिलते, लेकिन इसके गुरुत्वाकर्षण प्रभावों के कारण इसके अस्तित्व का अनुमान लगाया जाता है। आकाशगंगाओं की संरचना और उनकी गति को समझाने में डार्क मैटर की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।
वैज्ञानिकों ने इस समस्या को समझाने के लिए अतिरिक्त आयामों से जुड़ी भौतिकी का सहारा लिया है। यह विचार नया नहीं है। 1999 में प्रस्तावित रैंडल-संड्रम मॉडल ने ऐसे मुड़े हुए अतिरिक्त आयामों की संभावना पर चर्चा की थी।
2021 में ‘द यूरोपियन फिजिकल जर्नल सी’ में प्रकाशित एक अध्ययन में इसी तरह के मॉडल का इस्तेमाल डार्क मैटर की समस्या को समझाने के लिए किया गया। शोधकर्ताओं ने पांच आयामों वाली एक सैद्धांतिक व्यवस्था पर विचार किया, जिसमें कुछ मूलभूत कण इस अतिरिक्त आयाम में मौजूद हो सकते हैं।
इस मॉडल में एक नए प्रकार के स्केलर क्षेत्र को ‘पोर्टल’ की भूमिका दी गई है। यह क्षेत्र हिग्स क्षेत्र के साथ मिश्रित होकर हमारे परिचित सामान्य पदार्थ और एक छिपे हुए डार्क सेक्टर के बीच संभावित संबंध स्थापित कर सकता है।
सरल भाषा में समझें तो वैज्ञानिक एक ऐसे सैद्धांतिक रास्ते की कल्पना कर रहे हैं, जिसके जरिए सामान्य कणों की दुनिया और डार्क मैटर से जुड़ी छिपी हुई दुनिया के बीच किसी तरह का संपर्क संभव हो सकता है।
शोधकर्ताओं ने यह भी गणना की कि क्या इस मॉडल के जरिए ब्रह्मांड में मौजूद डार्क मैटर की अनुमानित मात्रा को समझाया जा सकता है और साथ ही यह मौजूदा प्रयोगों से मिली सीमाओं के भीतर भी रह सकता है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि वैज्ञानिकों ने सचमुच अंतरिक्ष में पांचवें आयाम का कोई दरवाजा या पोर्टल खोज लिया है। यहां ‘पोर्टल’ शब्द एक सैद्धांतिक भौतिक अवधारणा के लिए इस्तेमाल किया गया है।
यह मॉडल अभी वैज्ञानिक सिद्धांत और गणितीय संभावना के स्तर पर है। इसे वास्तविकता साबित करने के लिए प्रयोगात्मक प्रमाण जरूरी होंगे। फिर भी, अतिरिक्त आयामों और डार्क मैटर के बीच संभावित संबंध की यह अवधारणा वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड की उन पहेलियों को समझने का एक नया रास्ता देती है, जिनका जवाब मौजूदा मानक मॉडल में अभी पूरी तरह नहीं मिला है।
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