यूजीसी-नेट री-एग्जाम पर राहुल गांधी का हमला, बोले- गलती एनटीए की, सजा छात्रों को क्यों?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने यूजीसी-नेट के तीन विषयों की दोबारा परीक्षा कराने के फैसले को लेकर केंद्र सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी पर निशाना साधा है। उन्होंने सवाल उठाया कि परीक्षा व्यवस्था में गलती एनटीए की है, लेकिन उसका खामियाजा छात्रों को क्यों भुगतना पड़ रहा है।
राहुल गांधी ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था अब ठीक तरीके से काम नहीं कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों को बार-बार परीक्षा और उससे जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। राहुल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनटीए की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।
दरअसल, यूजीसी-नेट की समाजशास्त्र, अंग्रेजी और वाणिज्य विषयों की परीक्षाएं 22 से 30 जून के बीच आयोजित की गई थीं। बाद में इन तीनों परीक्षाओं को रद्द कर दोबारा आयोजित करने का फैसला लिया गया। एनटीए के अनुसार, परीक्षा में गलत प्रश्नपत्र सेट होने और पुराने प्रश्न दोहराए जाने से जुड़ी गड़बड़ियां सामने आई थीं।
री-एग्जाम के फैसले के बाद हजारों अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा की तैयारी करनी पड़ रही है। उम्मीदवारों ने पहले परीक्षा की तैयारी, आवेदन शुल्क और परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में समय और संसाधन लगाए थे। अब उन्हें सितंबर में फिर से परीक्षा देनी होगी।
राहुल गांधी ने इसी मुद्दे को उठाते हुए कहा कि गलती परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी की है, लेकिन सजा छात्रों को भुगतनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि छात्रों ने लंबे समय तक तैयारी की और अब उन्हें दोबारा उसी प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है।
राहुल गांधी ने एनटीए की नेतृत्व व्यवस्था को भी जवाबदेह ठहराने की मांग की। उन्होंने कहा कि तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा पहला कदम था, लेकिन इसे अंतिम कदम नहीं माना जाना चाहिए। उनके अनुसार, परीक्षा व्यवस्था में जिम्मेदारी तय करने के लिए एनटीए के नेतृत्व से भी जवाब मांगा जाना चाहिए।
उन्होंने दोबारा परीक्षा देने वाले छात्रों से कहा कि समस्या उनकी नहीं है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि परीक्षा व्यवस्था की कमियों का असर छात्रों के भविष्य पर पड़ रहा है और जब तक सरकार इन सवालों का जवाब नहीं देती, कांग्रेस इस मुद्दे को उठाती रहेगी।
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