केरल का नाम बदलकर हुआ ‘केरलम’, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दी विधेयक को मंजूरी
केरल का नाम अब आधिकारिक रूप से ‘केरलम’ कर दिया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्य का नाम बदलने से जुड़े विधेयक को मंजूरी दे दी है। संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के साथ ही यह विधेयक कानून बन गया है।
लोकसभा ने केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 को मंगलवार को मंजूरी दी थी। इसके बाद बुधवार को राज्यसभा ने भी इसे पारित कर दिया। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद संविधान में राज्य के नाम से जुड़े प्रावधानों में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे।
राज्यसभा में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया था कि केरल विधानसभा ने वर्ष 2024 में राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव पारित किया था। इसके बाद यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया। विधानसभा ने बाद में विधेयक पर अपनी सहमति भी दे दी।
संविधान की पहली अनुसूची में होगा बदलाव
केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक में संविधान की पहली अनुसूची में जरूरी संशोधन का प्रावधान किया गया है। इसके तहत संविधान के अनुच्छेद 3 के अनुसार ‘केरल’ नाम को बदलकर ‘केरलम’ किया जाएगा।
केरल का नाम बदलने की वजह क्या है?
केरल सरकार का कहना है कि ‘केरलम’ नाम राज्य की भाषाई, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा हुआ है। ‘केरल’ नाम को मलयालम के ‘केरलम’ शब्द का रूप माना जाता है। राज्य के नाम को उसके स्थानीय और पारंपरिक उच्चारण के अनुरूप करने के उद्देश्य से इसे ‘केरलम’ करने की मांग लंबे समय से उठती रही है।
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