मां कामाख्या मंदिर की अद्भुत वास्तुकला: विशाल गुम्बद से पंचरत्न तक, जानिए रात में कैसा दिखता है पूरा परिसर
असम के गुवाहाटी स्थित प्रसिद्ध मां कामाख्या मंदिर की वास्तुकला अपने अनोखे स्वरूप के लिए जानी जाती है। नीलाचल पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर रात में सुनहरी रोशनी से जगमगाता है तो इसका विशाल मुख्य गुम्बद पूरे परिसर का सबसे आकर्षक हिस्सा दिखाई देता है। मंदिर की संरचना में असमिया और अहोमकालीन स्थापत्य के साथ अलग-अलग वास्तु शैलियों का प्रभाव देखने को मिलता है।
विशाल केंद्रीय गुम्बद है सबसे खास
मंदिर का मुख्य गुम्बद सामान्य उत्तर भारतीय मंदिरों के ऊंचे और नुकीले शिखरों से अलग दिखाई देता है। यह गोल और उभरा हुआ है, जिसकी बाहरी संरचना में क्षैतिज पट्टियां दिखाई देती हैं। आधिकारिक वास्तु विवरण के अनुसार, मुख्य मंदिर का सुपर-स्ट्रक्चर परिवर्तित सारासेनिक गुम्बद शैली से प्रभावित है और इसका बाहरी स्वरूप 16-पक्षीय ज्यामितीय संरचना से विकसित हुआ है।
गुम्बद के सबसे ऊपर स्वर्णिम कलशाकार अलंकरण दिखाई देता है। रात में इस पर पड़ने वाली रोशनी मंदिर की ऊर्ध्वाकार संरचना को और आकर्षक बना देती है।
गुम्बद के नीचे है पवित्र गर्भगृह
मंदिर के विशाल बाहरी गुम्बद के नीचे गर्भगृह स्थित है। यहां मां कामाख्या की पूजा किसी मानवाकार प्रतिमा के रूप में नहीं होती। गर्भगृह में प्राकृतिक शिला की योनि-आकृति वाली पवित्र संरचना पूजित है, जहां प्राकृतिक जलस्रोत का जल रहता है।
यह गर्भगृह भूमि के स्तर से नीचे गुफानुमा स्थान में स्थित है और वहां पहुंचने के लिए पत्थर की सीढ़ियों से नीचे जाना पड़ता है। यही वजह है कि बाहर से दिखाई देने वाली विशाल संरचना के भीतर एक अपेक्षाकृत छोटा और गुफानुमा पवित्र स्थान मौजूद है।

पंचरत्न के पांच गुम्बद भी आकर्षण का केंद्र
मुख्य मंदिर से जुड़े भोगमंदिर के ऊपर पंचरत्न शैली के पांच गुम्बदाकार शिखर दिखाई देते हैं। इनमें एक मध्य में और चार उसके आसपास स्थित हैं। रात में सुनहरी रोशनी से जगमगाते ये पांचों गुम्बद मुख्य गुम्बद के सामने एक आकर्षक स्थापत्य संरचना बनाते हैं।
जगमोहन और नटमंदिर की अलग पहचान
मंदिर परिसर में जगमोहन यानी प्रमुख मंडप भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। मंदिर की वास्तु संरचना में गर्भगृह, अंतराल, जगमोहन, भोगमंदिर और नटमंदिर जैसे अलग-अलग हिस्सों का उल्लेख मिलता है।
नटमंदिर की छत और संरचना मुख्य गुम्बद से अलग है। इसमें असमिया और अहोमकालीन स्थापत्य का प्रभाव दिखाई देता है। इसका अग्रभाग अर्धवृत्ताकार शैली का है, जो इसे परिसर के दूसरे हिस्सों से अलग पहचान देता है।
दीवारों पर दिखाई देती है समृद्ध मूर्तिकला
मंदिर की बाहरी दीवारों पर देवी-देवताओं, धार्मिक प्रतीकों, मानव आकृतियों, पशु-पक्षियों, वनस्पतियों और ज्यामितीय अलंकरणों से जुड़ी मूर्तिकला देखने को मिलती है। रात में जब मंदिर पर रोशनी पड़ती है, तो इन मूर्तियों की आकृतियां और उनकी छायाएं और अधिक उभरकर दिखाई देती हैं।
ड्रोन से ऐसा दिखाई देता है पूरा मंदिर परिसर
ऊंचाई से देखने पर मुख्य विशाल गुम्बद, उसके आसपास के छोटे शिखर, पंचरत्न के पांच गुम्बद, मंडप और नटमंदिर की अलग शैली की छत एक साथ दिखाई देती है। नीचे पत्थर का प्रांगण, सीढ़ियां और रास्ते हैं, जबकि चारों ओर नीलाचल पहाड़ी की हरियाली नजर आती है।
रात के समय रोशनी से सजा मां कामाख्या मंदिर दूर से नीलाचल पहाड़ी पर सुनहरे मुकुट की तरह दिखाई देता है। मंदिर की अनोखी वास्तुकला और धार्मिक महत्व इसे देश के प्रमुख शक्तिपीठों में विशेष स्थान देते हैं।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)