रसूख के आगे झुका प्रशासन? सील की गई विधानसभा अध्यक्ष के भाई की बिल्डिंग कुछ घंटों में ही खोली गई
कानपुर में लखनऊ अग्निकांड के बाद बेसमेंट में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर चल रहे अभियान के बीच एक कार्रवाई ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) ने बुधवार को शहर के विभिन्न क्षेत्रों में कोचिंग संस्थानों, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कई भवनों को सील किया। इसी दौरान चकेरी क्षेत्र के हरजिंदर नगर स्थित एक भवन को भी सील किया गया, जो विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के भाई बिट्टू महाना से जुड़ा बताया जा रहा है।
केडीए की टीम ने जांच के दौरान भवन के बेसमेंट में रेस्तरां और कोचिंग गतिविधियां संचालित होने का हवाला देते हुए सीलिंग की कार्रवाई की। हालांकि, कार्रवाई के तुरंत बाद मामला हाई-प्रोफाइल हो गया। बताया जाता है कि सीलिंग के बाद बिट्टू महाना ने अधिकारियों से कड़ी आपत्ति जताते हुए सवाल उठाया कि यदि भवन में कोई अनियमितता थी तो पिछले करीब दो दशकों में प्रशासन ने इस पर कभी ध्यान क्यों नहीं दिया। उन्होंने कहा कि यह भवन वर्ष 2005-06 में निर्मित हुआ था और इतने वर्षों तक किसी विभाग ने कोई आपत्ति दर्ज नहीं की।
मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब सीलिंग के कुछ ही घंटों बाद केडीए अधिकारियों ने भवन की सील हटा दी। इसके बाद प्राधिकरण ने भवन स्वामी को कारण बताओ नोटिस जारी कर अपना पक्ष स्पष्ट करने का अवसर दिया। इस घटनाक्रम के बाद प्रशासन की निष्पक्षता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और सवाल उठ रहे हैं कि जिन मानकों के उल्लंघन के आधार पर भवन को सील किया गया था, उनमें ऐसा क्या बदलाव आ गया कि कुछ ही घंटों में कार्रवाई वापस लेनी पड़ी।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद केडीए अधिकारी बचाव की मुद्रा में नजर आए। उनका कहना है कि सुरक्षा मानकों और भवन उपविधियों के उल्लंघन के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है और नोटिस जारी करना भी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि, भवन को सील करने और फिर इतनी जल्दी खोलने के फैसले ने प्रशासनिक कार्रवाई की पारदर्शिता और प्रभावशाली लोगों के प्रभाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
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