गोरखपुर में अक्षय पात्र के अत्याधुनिक रसोईघर का उद्घाटन, 1 लाख बच्चों को मिलेगा पौष्टिक भोजन
गोरखपुर (आरएनआई) अक्षय पात्र फाउंडेशन के गोरखपुर केंद्रीकृत रसोईघर का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज उद्घाटन किया। यह रसोईघर फर्टिलाइज़र रोड, घोसीपुरवा, चिलुआताल पुलिस स्टेशन के पास, नकहा जंगल रेलवे स्टेशन के सामने बना है। इस किचन की क्षमता 4 से 5 घंटे में 1 लाख स्कूली बच्चों को भोजन तैयार करने की है।

शुरुआत में यह किचन पहले 50000 और बाद में एक लाख स्कूली बच्चों को दोपहर का गरमा गरम पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराएगी। यह किचन स्थानीय लोगों को रोजगार भी देगी। यहां 350 से ज्यादा लोगों को नौकरी के मौके मिलेंगे। स्कूलों में खाना पहुंचाने के लिए 23 इलेक्ट्रिक गाड़ियां और 12 नॉर्मल डिलीवरी गाड़ियां हैं। ये 29 रूटों पर समय से खाना पहुंचाएंगी।

मुख्यमंत्री योगी गोरखपुर में किचन स्थापित करने के लिए अक्षय पात्र को धन्यवाद देते हुए कहा कि बच्चों को अच्छा भोजन मिलेगा तो उनका स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए बड़े गौरव और सम्मान की बात है कि यह कार्यक्रम गोरखपुर की पवित्र धरती पर आयोजित हो रहा है। उन्होंने कहा कि एक विकसित राष्ट्र तभी बन सकता है जब उसके बच्चे शिक्षित हों, स्वस्थ हों और संस्कारवान हों। भूख और कुपोषण बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास दोनों पर बुरा असर डालते हैं। पोषण, शिक्षा और संस्कार, ये तीन स्तंभ हैं जिन पर एक मजबूत, आत्मनिर्भर और विकसित भारत का भविष्य टिका है। जब बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार और पर्याप्त पोषण भी मिलता है, तभी वे देश की प्रगति में सार्थक योगदान दे पाते हैं।

अक्षय पात्र फाउंडेशन द्वारा किया जा रहा यह पवित्र कार्य श्रील प्रभुपाद जी के विचारों और शिक्षाओं से प्रेरित है। अक्षय पात्र फाउंडेशन के उपाध्यक्ष श्री चंचलापति दास जी ने कहा था कि मानवता की सेवा, खासकर बच्चों की सेवा, हमारा पवित्र कर्तव्य है।आधुनिक तकनीक से लैस और स्वच्छता, गुणवत्ता व कार्यकुशलता के उच्चतम मानकों पर चलने वाली यह सुविधा यह सुनिश्चित करेगी कि बच्चों तक पौष्टिक भोजन समय पर और सम्मान के साथ पहुंचे। अक्षय पात्र फाउंडेशन यह आदर्श स्थापित कर रही हैं कि बच्चों को मिलने वाला भोजन स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा के सर्वोत्तम मानकों पर तैयार हो। जब हर बच्चा स्वस्थ होगा, शिक्षित होगा और सशक्त होगा, तभी हम एक समृद्ध, आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र की मजबूत नींव रख पाएंगे। आज पौष्टिक भोजन पाने वाले बच्चे ही कल के वैज्ञानिक, शिक्षक, उद्यमी, प्रशासक और राष्ट्र निर्माता बनेंगे।
उन्होंने कहा कि 2.5 एकड़ क्षेत्र में निर्मित यह रसोई गैस एवं स्टीम आधारित हाइब्रिड परिचालन मॉडल पर कार्य करती है, जो पर्यावरणीय स्थिरता और परिचालन दक्षता के प्रति फाउंडेशन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। रसोई में जल संरक्षण हेतु उन्नत प्रणालियाँ स्थापित की गई हैं, जिनमें वर्षा जल संचयन अवसंरचना तथा 2 लाख लीटर क्षमता वाला अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र शामिल है। विशेषीकृत रसोई उपकरणों में दो रोटी निर्माण मशीनें हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता प्रति घंटे 40,000 रोटियां तैयार करने की है, जिससे बड़े स्तर पर भोजन उत्पादन में निरंतरता सुनिश्चित होती है। 160 किलोवाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र इस सुविधा के संचालन का महत्वपूर्ण हिस्सा संचालित करता है, जबकि हाइब्रिड बॉयलर प्रणाली पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता को कम करती है। दूसरे चरण में एक बायोगैस संयंत्र भी स्थापित किया जाएगा, जो इस रसोई की पर्यावरणीय स्थिरता एवं अपशिष्ट प्रबंधन क्षमताओं को और सुदृढ़ करेगा।
श्री चंचलपति दास जी ने कहा कि किसी भी बच्चे को भूख के कारण शिक्षा से वंचित नहीं होना चाहिए। यही हमारा मिशन है, जिसे हम प्रतिदिन ऐसे प्रयासों के माध्यम से आगे बढ़ाते हैं। यह तभी संभव हो पाता है जब सरकार, कॉर्पोरेट जगत और हमारे जैसे संगठन एक साथ मिलकर कार्य करते हैं।
द अक्षय पात्र फाउंडेशन एक गैर-लाभकारी संस्था है तथा भारत सरकार की प्रमुख पीएम पोषण योजना की क्रियान्वयन सहयोगी है। भारत सरकार, राज्य सरकारों, कॉर्पोरेट साझेदारों एवं परोपकारी दानदाताओं के साथ एक सुदृढ़ सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के अंतर्गत कार्य करते हुए, फाउंडेशन का उद्देश्य कक्षा में भूख की समस्या को समाप्त करना तथा बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा को सशक्त बनाना है।
वर्ष 2000 में स्थापित अक्षय पात्र फाउंडेशन ने अपनी विनम्र शुरुआत से लेकर खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त सामाजिक आंदोलन का रूप ले लिया है। वर्षों के दौरान इसके कार्यक्रमों ने विद्यालयों में नामांकन एवं उपस्थिति बढ़ाने, कक्षा में भूख कम करने, शैक्षणिक प्रदर्शन सुधारने तथा बच्चों के पोषण स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आज फाउंडेशन का रसोई नेटवर्क 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों तक फैला हुआ है, जो 25,000 से अधिक विद्यालयों एवं आंगनवाड़ियों में 23.5 लाख से अधिक लाभार्थियों को प्रतिदिन पौष्टिक भोजन उपलब्ध करा रहा है।
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