बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाले में बड़ा एक्शन, ‘दागी’ शिक्षकों से होगी वेतन और ब्याज की वसूली
पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले को लेकर राज्य शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर उन ‘दागी’ शिक्षकों और कर्मचारियों की सूची तैयार करने को कहा है, जिन्होंने कथित तौर पर पैसे देकर सरकारी स्कूलों में नौकरी हासिल की थी। इसके साथ ही उनकी सेवा अवधि के दौरान मिले वेतन और उस पर बने ब्याज की गणना कर पूरी राशि वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए गए हैं।
यह कार्रवाई वर्ष 2016 की पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामले में की जा रही है। अदालतों ने भर्ती प्रक्रिया में भारी अनियमितताओं को देखते हुए करीब 26,000 शिक्षण और गैर-शिक्षण पदों पर हुई नियुक्तियों को रद्द कर दिया था। इनमें 18,418 शिक्षण कर्मचारी शामिल बताए गए हैं, जबकि बाकी गैर-शिक्षण कर्मचारी थे।
जांच में सामने आया था कि कई उम्मीदवारों ने खाली या अधूरे उत्तर-पत्र जमा करने के बावजूद नौकरी हासिल कर ली थी। कुछ मामलों में रैंकिंग में हेरफेर और पैनल से बाहर नाम जोड़कर नियुक्तियां देने के आरोप भी लगे थे। अदालत ने ऐसे उम्मीदवारों को ‘दागी’ मानते हुए उनसे सरकारी धन की वसूली का आदेश दिया था।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कोलकाता उच्च न्यायालय ने 2024 में पूरे भर्ती पैनल को रद्द कर दिया था, जिसके बाद 2025 में उच्चतम न्यायालय ने भी इस फैसले को बरकरार रखा। दोनों अदालतों ने स्पष्ट कहा था कि अवैध तरीके से नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों से वेतन और ब्याज दोनों वापस लिए जाएं।
अब राज्य प्रशासन ने इस आदेश को लागू करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे संबंधित उम्मीदवारों की पहचान कर पूरी वित्तीय जानकारी तैयार करें, ताकि सरकारी धन की रिकवरी की जा सके। इस कार्रवाई से राज्य की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था में एक बार फिर हलचल बढ़ गई है।
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