चिंताजनक रिपोर्ट: एशिया के अंतिम उष्णकटिबंधीय ग्लेशियर 99% सिमटे, 2030 तक पूरी तरह गायब होने का खतरा
जकार्ता (आरएनआई) जलवायु परिवर्तन और अल नीनो के बढ़ते प्रभाव ने एशिया के अंतिम उष्णकटिबंधीय हिमनदों (ग्लेशियरों) को गंभीर संकट में डाल दिया है। इंडोनेशिया के पापुआ प्रांत स्थित पुंचक जया पर्वत पर मौजूद ग्लेशियरों पर किए गए एक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि वर्ष 1850 के बाद से इनका क्षेत्रफल लगभग 99 प्रतिशत तक घट चुका है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि मौजूदा गति से बर्फ पिघलती रही तो वर्ष 2030 तक यहां के शेष हिमनद भी पूरी तरह समाप्त हो सकते हैं।
शोध के अनुसार, वर्ष 1850 में पुंचक जया क्षेत्र के ग्लेशियरों का कुल विस्तार लगभग 19.3 वर्ग किलोमीटर था, जो अब घटकर महज 0.16 से 0.23 वर्ग किलोमीटर के बीच रह गया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक पिछले 44 वर्षों में यहां मौजूद करीब 97 प्रतिशत बर्फ खत्म हो चुकी है।
कभी इस पर्वतीय क्षेत्र में छह प्रमुख हिमनद मौजूद थे, लेकिन अब केवल दो ग्लेशियर—Carstensz Glacier और East Northwall Firn—ही बचे हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि तापमान वृद्धि और मौसमीय बदलाव की वर्तमान प्रवृत्ति जारी रही, तो ये भी अगले कुछ वर्षों में समाप्त हो सकते हैं।
वैज्ञानिकों का कहना है कि वैश्विक तापमान में लगातार बढ़ोतरी ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने का मुख्य कारण है। इसके साथ ही अल नीनो जैसी जलवायु घटनाओं ने इंडोनेशिया में तापमान और शुष्कता बढ़ाकर इस प्रक्रिया को और तेज कर दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल इंडोनेशिया या एशिया का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चेतावनी है। ग्लेशियरों का तेजी से सिकुड़ना समुद्र-स्तर वृद्धि, जल संसाधनों पर दबाव और वैश्विक जलवायु असंतुलन जैसे गंभीर खतरों का संकेत माना जा रहा है। वैज्ञानिकों ने इसे जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों का एक स्पष्ट और चिंताजनक उदाहरण बताया है।
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