असम में बाढ़ की तबाही: 103 लोगों की मौत, सात लाख से ज्यादा विस्थापित; 433 गांव जलमग्न, अब पुनर्वास की चुनौती
असम में इस साल बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। 19 जुलाई से शुरू हुए बाढ़ के दौर में अब तक 103 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि सात लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं। राज्य के 433 गांव अब भी बाढ़ से प्रभावित बताए जा रहे हैं। पानी का स्तर कई इलाकों में कम होने लगा है, लेकिन बाढ़ के बाद प्रभावित परिवारों के सामने जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
ऊपरी असम के शिवसागर और चराइदेव जिलों में बाढ़ का असर सबसे गंभीर रहा। 19 जुलाई से 27-28 जुलाई के बीच कई इलाकों में स्थिति बेहद खराब हो गई थी। नगालैंड के मोन जिले की पहाड़ियों में हुई भारी बारिश के बाद दिखौ नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया, जिससे आसपास के कई गांवों में पानी घुस गया। शिवसागर और चराइदेव के अलावा गोलाघाट सहित अन्य इलाकों में भी लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
बाढ़ का पानी कम होने के बाद अब तबाही की तस्वीरें सामने आ रही हैं। कई घरों में कीचड़ और गाद जमा है। नतून बस्ती, हिलनी, सिंगेल बस्ती और गंगेडाढ़ा जैसे इलाकों में लोगों के घरेलू सामान पानी और कीचड़ में खराब हो गए। कई जगह दीवारें क्षतिग्रस्त हुई हैं, जबकि कपड़े, बर्तन, अनाज और बच्चों की किताबें बर्बाद हो गईं। बड़ी संख्या में मवेशियों के बह जाने से पशुपालकों के सामने भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
बाढ़ के शुरुआती दौर में जब कई स्थानों तक राहत और बचाव दल पहुंचना मुश्किल था, तब स्थानीय मल्लाहों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गांव के करीब 25 मल्लाहों ने नावों के जरिए तेज बहाव के बीच लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। उनके प्रयासों से करीब 1,500 लोगों को सुरक्षित निकालने की जानकारी सामने आई है।
बाढ़ ने लोगों के घरों के साथ उनकी आजीविका को भी प्रभावित किया है। 10,884 हेक्टेयर से अधिक फसल क्षेत्र को नुकसान पहुंचने की जानकारी दी गई है। किसानों के सामने अब खेतों को दोबारा तैयार करने और आय का साधन जुटाने की चुनौती है। जिन परिवारों के घर और रोजगार दोनों प्रभावित हुए हैं, उनके लिए सामान्य जीवन में लौटना आसान नहीं होगा।
बच्चों की पढ़ाई पर भी बाढ़ का गंभीर असर पड़ा है। कई बच्चों की किताबें, कॉपियां और स्कूल का सामान पानी और कीचड़ में खराब हो गया। ऐसे में प्रभावित परिवारों के सामने घरों की मरम्मत और रोजगार शुरू करने के साथ बच्चों की पढ़ाई दोबारा शुरू कराने की चुनौती भी है।
बाढ़ के बाद भी करीब 49 हजार विस्थापित लोगों के राहत शिविरों और वितरण केंद्रों में रहने की जानकारी सामने आई है। राज्य में करीब 125 राहत शिविरों में प्रभावित लोगों को रखा गया है। अब प्रशासन के सामने राहत पहुंचाने के साथ-साथ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत, कृषि क्षेत्र को दोबारा खड़ा करने और बच्चों की शिक्षा बहाल करने की चुनौती है।
असम में बाढ़ का पानी भले ही कई इलाकों से उतरने लगा हो, लेकिन प्रभावित परिवारों के लिए असली संघर्ष अब शुरू हुआ है। घर, फसल, पशुधन और रोजगार गंवाने वाले लोगों को दोबारा सामान्य जीवन में लौटने के लिए लंबे समय तक सरकारी सहायता और पुनर्वास की जरूरत होगी।
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