क्राइस्ट स्कूल भूमि आवंटन प्रकरण में तहसीलदार कोर्ट पहुंची आपत्ति, सकल हिंदू समाज ने उठाए कई सवाल

Friday, June 12, 2026 - 22:35
Updated: 2 months ago
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क्राइस्ट स्कूल भूमि आवंटन प्रकरण में तहसीलदार कोर्ट पहुंची आपत्ति, सकल हिंदू समाज ने उठाए कई सवाल

गुना (आरएनआई) क्राइस्ट स्कूल के भूमि आवंटन प्रकरण में आज तहसीलदार कोर्ट में सकल हिंदू समाज के प्रतिनिधि दीपेंद्र साहू की ओर से विधिवत आपत्ति पेश की गई। नगर तहसीलदार शालिनी भार्गव ने आपत्ति को सुना। समाचार पत्रों में प्रकाशित जाहिर सूचना क्रमांक/री.1/2026/89 गुना, दिनांक 09/06/2026 के क्रम में आपत्ति प्रस्तुत करते अभिभाषकों द्वारा हुए तर्क रखे गए।

तहसीदार कोर्ट को बताया गया कि चैरिटेबल संस्था सी.एम.आई. सेवा संघ सागर क्राईस्ट स्कूल गुना द्वारा ग्राम कस्बा गुना स्थित भूमि सर्वे नं. 708 रकबा 0.1990 है, भूमि पर खेल मैदान निर्माण हेतु भूमि आवंटन का प्रकरण कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत किया गया है और जो वर्तमान में आपके समक्ष विचाराधीन है, उस भूमि पर अवैध रूप से दशकों तक चैरिटेबल संस्था सी.एम.आई. सेवा संघ सागर के द्वारा क्राईस्ट स्कूल गुना के खेल मैदान में शामिल कर उसका उपयोग किया जा रहा था। 

नवंबर 2022 में व्यापक जन आंदोलन और विरोध के बाद तत्कालीन तहसीलदार सिद्धार्थ शर्मा के नेतृत्व में प्रशासन की टीम ने उक्त भूमि से क्राइस्ट स्कूल का अवैध अतिक्रमण हटाया गया था। ऐसे में पूर्व की परिस्थितियों के दृष्टिगत संस्था के आवेदन पर विचार ही नहीं किया जाना था। इसके बाद भी यदि संस्था को भूमि आवंटित की गई तो एक गलत प्रथा जन्म लेगी तथा प्रशासनिक अधिकारियों की मंशा पर भी प्रश्नचिन्ह खड़े होंगे।

स्कूल पर पूर्व से ही पर्याप्त भूमि है। स्कूल के द्वारा विद्यार्थियों को मुफ्त शिक्षा नहीं दी जाती। शिक्षा देने के बदले मोटी रकम फीस, डोनेशन तथा अन्य गतिविधियों के नाम पर वसूली जाती है, जिससे संस्था को हर वर्ष करोड़ो रुपए का मुनाफा होता है। संस्था आर्थिक रूप से बेहद समृद्ध है और बाजार भाव में जमीन क्रय करने में सक्षम है, इस शासकीय भूमि का उपयोग निजी हित में किया जाएगा। इसलिए भूमि आवंटित न की जाए।

यह तथ्य भी रखा गया कि नवंबर 2022 की स्थिति में क्राइस्ट स्कूल पर नगरपालिका का 89 लाख रुपए टैक्स बकाया था, जो अब और बढ़ चुका है, इससे प्रतीत होता है कि संस्था डिफाल्टर है और शासन के टैक्स जमा नहीं करती। साथ ही स्वयं के अल्पसंख्यक संस्था होने का बेजा फायदा उठाना चाहती है, यहां पुनः स्पष्ट किया जाता है कि संस्था द्वारा क्राइस्ट स्कूल में बच्चों को न तो मुफ्त में एडमिशन दिया जाता है और न ही मुफ्त शिक्षा दी जाती है। इसलिए संस्था भूमि आवंटन के लिए अपात्र है।

सबसे गंभीर बात ये है कि नवंबर 2022 में क्राइस्ट स्कूल के तत्कालीन प्रिंसिपल के निर्देश पर स्कूल के दो टीचर्स ने एक बच्चे को इसलिए प्रताड़ित किया था कि उसने असेंबली (प्रार्थना) के बाद वंदे मातरम् का नारा लगा दिया था। इस घटना की सूचना मिलने से लोग आक्रोशित हुए थे आरोपी टीचर्स के विरुद्ध सिटी कोतवाली गुना में पीड़ित बच्चे के पिता की ओर से एफआईआर दर्ज कराई गई थी। भारत के संविधान में वंदे मातरम् बोलना अपराध नहीं है। क्राइस्ट स्कूल जो वंदे मातरम् का विरोधी है उसके भूमि आवंटन प्रकरण पर विचार करना भी घोर आपत्तिजनक है।

तहसीलदार कोर्ट के ध्यान में लाया गया कि, गुना में ईसाई मिशनरीज के द्वारा जिले के अनुसूचित जनजाति समुदाय के गांवों में धर्म परिवर्तन की अवैध गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है। विगत माह बमौरी के ग्राम मोहनपुर में चंगाई सभा आयोजित कर जनजातीय समुदाय का धर्म परिवर्तन करने के अपराध में थाना म्याना में ईसाई पास्टर के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई गई है। चैरिटेबल संस्था सी.एम.आई. सेवा संघ सागर की भूमिका भी संदिग्ध है। यदि ऐसी संस्थाओं को शासकीय भूमि आवंटित की जाएगी तो ये गैर कानूनी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के समान होगा।

नवंबर 2022 में मध्यप्रदेश बाल आयोग की टीम के द्वारा क्राइस्ट स्कूल का निरीक्षण करने पर तमाम अनियमितताएं पाईं गई थीं। आयोग के अध्यक्ष ने कहा था कि "ऐसी संस्थाएं अल्पसंख्यक की आड़ में देश से धोखाधड़ी और बच्चों का मन दूषित नहीं कर सकतीं।" इससे स्पष्ट है कि उक्त संस्था देशहित में कोई कार्य नहीं कर रही बल्कि कुछ नियम कानूनों की आड़ में अपना एजेंडा लागू करने में जुटी है उसकी मंशा दूषित है। ऐसे में यदि भूमि आवंटित की जाती है तो उसका दुरुपयोग किया जाएगा।

क्राइस्ट स्कूल परिसर में कई भवन बिना सक्षम निर्माण अनुमति के बने हुए हैं। जिनमें सुरक्षा के निर्धारित मापदंडों का पालन नहीं किया जाता, जैसे फायर सेफ्टी ऑडिट आदि नहीं होता। ऐसे में यदि संस्था को भूमि आवंटित की जाएगी तो संपूर्ण व्यवस्था कठघरे में नजर आएगी।

तहसीलदार कोर्ट में उक्त आपत्तियों के दृष्टिगत प्रकरण पर यांत्रिक मनोदशा से विचार करने के स्थान पर व्यापक दृष्टिकोण से वस्तुनिष्ठ विश्लेषण कर निर्णय लेकर प्रकरण खारिज करने के आदेश प्रदान करने की प्रार्थना की गई जिससे लोक शांति बनी रहे तथा समाज में गलत संदेश न जाए।

सकल हिंदू समाज के प्रतिनिधि दीपेंद्र साहू की ओर से तहसीलदार कोर्ट में पैरवी के लिए एडवोकेट आशीष शिंदे, एडवोकेट दीपक रजक, एडवोकेट राजेंद्र खटीक, एडवोकेट नीलेश सक्सेना, एडवोकेट रमेश जाटव और एडवोकेट अनीता पंत उपस्थित हुए। प्रकरण पर फैसला आना अभी बाकी है।

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