क्या वोट देने का अधिकार बनेगा मौलिक अधिकार? कांग्रेस की मांग तेज, चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
नई दिल्ली। (आरएनआई) कांग्रेस ने मतदान के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित किए जाने की मांग को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर दबाव बढ़ाया है। पार्टी का कहना है कि वोट देने का अधिकार लोकतंत्र की आधारशिला है और इसे संवैधानिक स्तर पर सर्वोच्च सुरक्षा मिलनी चाहिए, ताकि मतदाताओं को वोटर सूची से मनमाने ढंग से हटाए जाने या कथित वोटर दमन जैसी समस्याओं से बचाया जा सके।
कांग्रेस महासचिव Jairam Ramesh ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं और कई राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। उन्होंने दावा किया कि बाद में न्यायालयों के हस्तक्षेप के बाद कई नाम दोबारा जोड़े गए।
जयराम रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि Election Commission of India स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से कार्य नहीं कर रहा है तथा केंद्र सरकार के प्रभाव में दिखाई देता है। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में मतदान के अधिकार को मौलिक अधिकार का दर्जा देना आवश्यक हो जाता है, जिससे नागरिकों को न्यायिक संरक्षण का उच्चतम स्तर प्राप्त हो सके।
कांग्रेस नेता ने हाल ही में Supreme Court of India के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि यदि पैदल चलने के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी जा सकती है, तो मतदान जैसे लोकतांत्रिक अधिकार पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने संविधान सभा की बहसों का उल्लेख करते हुए कहा कि 1947 में सरदार Vallabhbhai Patel की अध्यक्षता वाली समिति में मतदान के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाने पर चर्चा हुई थी। उस समय B. R. Ambedkar और Jagjivan Ram ने इसके पक्ष में मजबूत तर्क रखे थे।
वर्तमान में भारत में मतदान का अधिकार संवैधानिक और वैधानिक अधिकार माना जाता है, लेकिन मौलिक अधिकार नहीं। ऐसे में कांग्रेस की यह मांग आने वाले समय में राजनीतिक और संवैधानिक बहस का विषय बन सकती है। हालांकि इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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