अस्पतालों-कोचिंग में कब थमेंगे अग्निकांड? सुप्रीम कोर्ट पहुंची मांग, राष्ट्रीय फायर सेफ्टी कानून बनाने की उठी आवाज
देशभर में स्कूलों, अस्पतालों, कोचिंग सेंटरों और अन्य सार्वजनिक इमारतों में बार-बार हो रहे अग्निकांडों के बीच सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में केंद्र सरकार से पूरे देश के लिए एक समान और सख्त राष्ट्रीय फायर एवं जीवन सुरक्षा कानून लागू करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि अलग-अलग राज्यों के अलग-अलग नियम और उनके कमजोर पालन के कारण लोगों की जान लगातार खतरे में पड़ रही है।
यह याचिका अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने दायर की है। उन्होंने मांग की है कि स्कूल, कोचिंग सेंटर, हॉस्टल, होटल, रेस्तरां, मॉल और अस्पताल जैसे भीड़भाड़ वाले परिसरों के लिए एक समान सुरक्षा मानक तय किए जाएं और उनका सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। याचिका में यह भी कहा गया है कि तीन से चार महीने के भीतर सभी राज्यों में विशेष फायर सेफ्टी ऑडिट कराया जाए, जिसमें स्कूलों, कोचिंग संस्थानों, अस्पतालों, होटलों और शॉपिंग मॉल को प्राथमिकता दी जाए।
याचिका में बिना मंजूरी के बेसमेंट, छतों, अस्थायी ढांचों और अवैध मंजिलों पर संचालित क्लासरूम, लाइब्रेरी, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने की भी मांग की गई है। साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाले भवन मालिकों और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आग्रह किया गया है।
**याचिका की पांच प्रमुख मांगें**
* पूरे देश के लिए एक समान और सख्त राष्ट्रीय फायर एवं जीवन सुरक्षा कानून लागू किया जाए।
* तीन से चार महीने के भीतर स्कूलों, कोचिंग सेंटरों, अस्पतालों, होटलों और मॉल का विशेष फायर ऑडिट कराया जाए।
* अवैध बेसमेंट, छतों, अस्थायी ढांचों और बिना अनुमति संचालित परिसरों में गतिविधियों पर तत्काल रोक लगे।
* फायर सेफ्टी नियमों का नियमित निरीक्षण, आपातकालीन निकासी व्यवस्था और सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
* नियमों के उल्लंघन पर भवन मालिकों के साथ-साथ जिम्मेदार सरकारी अधिकारियों की भी जवाबदेही तय कर कड़ी कार्रवाई की जाए।
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