दिमागी नक्सली’ शब्द पर नई बहस, कार्तिकेय की कथा और नक्सल शब्द को जोड़ने वाले दावे पर उठे सवाल
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया भाषण में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सली’ शब्द के बाद अब इसके अर्थ और उत्पत्ति को लेकर सोशल मीडिया पर एक अलग तरह की व्याख्या सामने आई है। एक वायरल पोस्ट में ‘नक्सली’ शब्द को भगवान कार्तिकेय की पौराणिक कथा और ‘नक्सल’ घास से जोड़ते हुए कई दावे किए गए हैं।
पोस्ट में दावा किया गया है कि ‘दिमागी’ का अर्थ मनोवैज्ञानिक और ‘नक्सली’ का संबंध उत्तर बंगाल में पाई जाने वाली एक विशेष प्रकार की घास से है। इसमें भगवान कार्तिकेय की जन्मकथा का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि उनका जन्म घास के बीच हुआ था और इसी वजह से उन्हें ‘नक्सली’ कहा जा सकता है।
पोस्ट में आगे कार्तिकेय को पहली कांवर यात्रा से जोड़ते हुए दावा किया गया है कि उन्होंने कंधे पर कांवर रखकर जल लेकर भगवान शिव की पूजा की थी। साथ ही हड़प्पा सभ्यता के कुछ प्रतीकों को भी कांवर और कार्तिकेय की पूजा से जोड़ने की कोशिश की गई है।
हालांकि, इन दावों को लेकर कोई स्पष्ट ऐतिहासिक या भाषाई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है। ‘नक्सली’ शब्द का आधुनिक राजनीतिक इस्तेमाल आम तौर पर 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी से शुरू हुए नक्सल आंदोलन से जुड़ा माना जाता है। वहीं, भगवान कार्तिकेय की जन्मकथा हिंदू पौराणिक परंपराओं में अलग-अलग रूपों में मिलती है।
ऐसे में ‘दिमागी नक्सली’ को भगवान कार्तिकेय, कांवर परंपरा या हड़प्पा सभ्यता से जोड़ने वाली व्याख्या को फिलहाल **ऐतिहासिक तथ्य के बजाय एक धार्मिक-पौराणिक और आधुनिक व्याख्या** के रूप में देखा जाना चाहिए।
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