“अभिमान टूटे तो भगवान भी बन जाते हैं द्वारपाल” — हाथरस में भागवत कथा का भावपूर्ण समापन

Monday, May 25, 2026 - 20:55
Updated: 3 months ago
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“अभिमान टूटे तो भगवान भी बन जाते हैं द्वारपाल” — हाथरस में भागवत कथा का भावपूर्ण समापन

हाथरस(आरएनआई) अभिमान टूटे तो भगवान खुद द्वारपाल बन जाते हैं। राजा बलि से 3 पग भूमि मांगकर भगवान ने सिखाया कि दान में अहंकार नहीं होना चाहिए।

        यह उद्गार अधिक मास के उपलक्ष में ब्रज के द्वार हाथरस के रुई की मंडी स्थित मंदिर ठाकुर श्री कन्हैया लाल जी महाराज परिसर में श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिन व्यास पीठ से बोलते हुए कथा व्यास पं. श्री हरि सुरेषाचार्य जी महाराज वृंदावन ने व्यक्त किए।

       इस अवसर पर उन्होंने मत्स्य, कूर्म, वराह, नृसिंह, परशुराम आदि अवतारों का बड़ा ही मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब राजा बलि का अभिमान टूटा तो भगवान उसके यहां द्वारपाल भी बन गए। कथा के समापन के बाद श्रीमद्भागवत जी की भव्य शोभा यात्रा नगर में घुमाई गई। शोभा यात्रा का जगह-जगह भव्य स्वागत हुआ। जबकि याज्ञ में पूर्ण आहूती के साथ भागवत कथा उत्सव संपन्न हुआ।

        महोत्सव में मंदिर कमेटी की ओर से अध्यक्ष राजकुमार कोठीवाल के अलावा रमेशचंद्र शर्मा "ब्रह्मचारी", मंदिर सेवायत पं.चेतन मिश्र, बौ. देवेश कौशिक जी, पं. राजा "रंगीला", कन्हैयालाल घी वाले, आलोक वार्ष्णेय, मनोज वार्ष्णेय, सौरभ मोबाइल वाले, पूर्व सभासद पवन गुप्ता तेल वाले, ठा.पवन पौरुष, बांके बिहारी वर्मा, दीपक वर्मा, एडवोकेट संजय दीक्षित, संजीव वर्मा आदि भक्ति सहयोग सराहनीय रहा। इस अवसर पर काफी संख्या में महिलाएं शक्ति एवं भक्तगण उपस्थित थे।

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