आजादी की लड़ाई में वागड़ ने भी बजाया बिगुल, तात्या टोपे से प्रजामंडल तक ऐसे जगा जनआंदोलन
बांसवाड़ा। देश के स्वतंत्रता आंदोलन में वागड़ अंचल की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। अंग्रेजी शासन और तत्कालीन रियासतों की नीतियों के विरोध से लेकर प्रजामंडल आंदोलन, सामाजिक सुधार और आदिवासी शिक्षा के प्रयासों तक क्षेत्र के क्रांतिकारियों, समाज सुधारकों और जननेताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। महिलाओं ने भी आंदोलनों में भाग लेकर स्वतंत्रता संघर्ष को मजबूती दी।
बांसवाड़ा की धरती पर गोविंद गुरु, गौरीशंकर उपाध्याय, बाबा लक्ष्मणदास, भूपेंद्रनाथ त्रिवेदी, धूलजी भाई भावसार, हरिदेव जोशी, नटवरलाल भट्ट, मास्टर सूरजमल, चिमनलाल मालोत, मणिशंकर नागर, मोहनलाल त्रिवेदी, बाबूलाल जौलाना, कन्हैयालाल सेठिया और भंवरलाल निगम समेत कई लोगों ने स्वतंत्रता आंदोलन और सामाजिक जागरण में योगदान दिया।
1857 की क्रांति के महानायक तात्या टोपे के बांसवाड़ा आगमन ने क्षेत्र में क्रांतिकारी चेतना को नई ऊर्जा दी। वे दो बार बांसवाड़ा आए और दूसरी बार क्षेत्र को घेरकर विजय हासिल की। उनके आगमन के बाद स्वतंत्रता और अंग्रेजी शासन के विरोध की भावना और मजबूत हुई। इसका प्रभाव आगे के आंदोलनों में भी देखने को मिला।
सामाजिक और शैक्षणिक जागरण के लिए भी वागड़ में कई प्रयास हुए। भोगीलाल पंड्या के नेतृत्व में आदिवासी समाज के शैक्षणिक विकास और सामाजिक समरसता के लिए काम किया गया। वर्ष 1932 में बाबा लक्ष्मणदास और मदनसिंह तोमर आदि के सहयोग से हरिजन सेवक समिति की स्थापना हुई। वहीं माणिक्यलाल वर्मा ने वागड़ सेवा मंदिर के माध्यम से रात्रि पाठशालाएं संचालित कर हरिजन और आदिवासी समाज को शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया।
राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में बाबा लक्ष्मणदास, धूलजी भाई भावसार, चिमनलाल मालोत, मणिशंकर नागर और भूपेंद्रनाथ त्रिवेदी जैसे नेताओं की भूमिका अहम रही। वर्ष 1930 में चिमनलाल मालोत ने शांत सेवा कुटीर की स्थापना कर राजनीतिक चेतना फैलाने का काम किया।
इसके बाद वर्ष 1943 में बांसवाड़ा प्रजामंडल का गठन हुआ। प्रजामंडल ने जनता के अधिकारों और राजनीतिक भागीदारी के लिए आवाज उठाई। तत्कालीन महारावल द्वारा प्रजामंडल की सभाओं पर रोक लगाए जाने के विरोध में नगर में हड़ताल और आंदोलन हुआ। बाद में यह रोक हटाई गई। भूपेंद्रनाथ त्रिवेदी के मुंबई से बांसवाड़ा पहुंचकर सक्रिय राजनीति में आने के बाद प्रजामंडल आंदोलन को और मजबूती मिली।
इस तरह वागड़ में क्रांतिकारी चेतना, सामाजिक सुधार, शिक्षा और राजनीतिक आंदोलनों ने मिलकर स्वतंत्रता संघर्ष को व्यापक जनआंदोलन का रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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