छात्रों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार: CJI सूर्यकांत ने BCI को लगाई फटकार, पूछा- बच्चों को कौन रोक सकता है?
सुप्रीम कोर्ट ने नालसर विश्वविद्यालय के छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को लेकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के निर्देशों पर कड़ी नाराजगी जताई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि छात्रों को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने बीसीआई की कार्रवाई को अनुचित बताते हुए उसकी भूमिका पर सवाल उठाए।
दरअसल, भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के खिलाफ विरोध अभियान में शामिल होने के बाद नालसर विश्वविद्यालय के छात्रों का नामांकन रोकने के निर्देश बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा की ओर से जारी किए गए थे। हालांकि बाद में इन निर्देशों को वापस ले लिया गया।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अगर छात्रों के पास विरोध करने का कोई कारण है तो उन्हें अपनी बात रखने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि छात्र चाहें तो उन्हें पत्र भी लिख सकते थे और यह छात्रों तथा उनके बीच संवाद का विषय है।
छात्रों को कौन रोक सकता है?
सीजेआई ने कहा कि वह खुद छात्र जीवन के दौरान छात्र गतिविधियों में शामिल रहे हैं। उनके मुताबिक, अगर छात्र शांतिपूर्वक अपनी आवाज उठा रहे हैं तो उन्हें ऐसा करने की अनुमति होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्र गलत भी हों, तब भी उन्हें शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है।
मुख्य न्यायाधीश ने सवाल उठाया कि जब छात्र कानूनी और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं तो बीसीआई या किसी अन्य संस्था को इसमें हस्तक्षेप करने की जरूरत क्यों है। उन्होंने बीसीआई की कार्रवाई को ‘बेवजह’ और ‘बिल्कुल अनुचित’ बताया।
ये टिप्पणियां वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर द्वारा बीसीआई अध्यक्ष के निर्देशों के खिलाफ दायर रिट याचिका का उल्लेख किए जाने के दौरान आईं। परमेश्वर ने अदालत को बताया कि बीसीआई अध्यक्ष ने बाद में निर्देश वापस ले लिए हैं, लेकिन याचिका पर सुनवाई का आधार अभी भी मौजूद है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)