आरजी कर केस: पूर्व टीएमसी विधायक को थाने के बाहर भीड़ ने पीटा, अंडे-कीचड़ भी फेंके
कोलकाता के आरजी कर अस्पताल की दुष्कर्म-हत्या पीड़िता की कथित जल्दबाजी में अंत्येष्टि का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। मामले में गिरफ्तार पूर्व टीएमसी विधायक निर्मल घोष और पूर्व पार्षद संजीब मुखर्जी को शुक्रवार को भीड़ के विरोध का सामना करना पड़ा। पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बावजूद लोगों ने दोनों को घेर लिया और उनके साथ मारपीट की। भीड़ ने उन पर जूते, अंडे और कीचड़ भी फेंके।
निर्मल घोष को एक दिन पहले ओडिशा से गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर पीड़िता के शव की जल्दबाजी में अंत्येष्टि कराने में भूमिका निभाई।
शुक्रवार को घोष को खड़दह पुलिस थाने से बैरकपुर उपमंडलीय अदालत ले जाया जा रहा था। इसी दौरान थाने के बाहर जमा भीड़ ने उन्हें घेर लिया। पुलिस और आरएएफ के जवानों ने सुरक्षा घेरा बनाया और घोष के सिर को हेलमेट से ढक दिया, लेकिन इसके बावजूद भीड़ ने उन पर हमला कर दिया। उनके कपड़ों पर कीचड़ और अंडे के निशान दिखाई दिए।
अदालत परिसर में भी लोगों ने घोष के खिलाफ नारेबाजी की। पुलिस ने किसी तरह उन्हें अदालत की हवालात तक पहुंचाया।
दूसरे आरोपी को भी भीड़ ने घेरा
मामले में गिरफ्तार दूसरे आरोपी संजीब मुखर्जी को भी अदालत ले जाते समय भीड़ ने घेर लिया। मुखर्जी पानीहाटी नगरपालिका के पूर्व पार्षद और घोष के करीबी सहयोगी बताए जाते हैं। आरोप है कि पोस्टमार्टम के बाद पीड़िता के शव को पानीहाटी श्मशान घाट ले जाने के दौरान वह वहां मौजूद थे।
मामले का तीसरा आरोपी पानीहाटी नगरपालिका का पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ डे अभी फरार है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
परिवार की शिकायत पर शुरू हुई नई जांच
पीड़िता के पिता ने सोमवार को नई शिकायत दर्ज कराई थी, जिसे बाद में एफआईआर में बदल दिया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि निर्मल घोष समेत तीन लोगों ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर परिवार की इच्छा के खिलाफ शव की जल्दबाजी में अंत्येष्टि कराई।
इसके बाद पुलिस ने मामले की नई जांच शुरू की है। यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि कथित जल्दबाजी में अंत्येष्टि का पहलू सीबीआई की जांच के दायरे में नहीं था।
पीड़िता के माता-पिता का आरोप है कि अंत्येष्टि इतनी जल्दी कराई गई कि दोबारा पोस्टमार्टम की संभावना खत्म हो गई। उनका दावा है कि दोबारा पोस्टमार्टम होने पर मामले से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते थे।
अब पुलिस की नई जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि अंत्येष्टि में इतनी जल्दबाजी क्यों की गई और इसमें गिरफ्तार आरोपियों की क्या भूमिका थी।
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