सवाल पूछने पर नक्सली कहना सही नहीं': पीएम मोदी के 'दिमागी नक्सल' बयान पर सीजेपी ने साधा निशाना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में 'दिमागी नक्सल' शब्द के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने पीएम मोदी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार से सवाल पूछने वाले युवाओं को नक्सली कहे जाने पर आपत्ति जताई है।
सौरव दास ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि 'दिमागी नक्सल' या कोई भी ऐसा नाम देकर शिक्षित युवाओं को निशाना बनाना स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि युवा सरकार से सवाल पूछते हैं तो उन्हें नक्सली कैसे कहा जा सकता है। दास ने सरकार पर समस्याओं का समाधान करने में विफल रहने का आरोप भी लगाया।
पीएम मोदी ने लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में कहा था कि सशस्त्र नक्सलवाद अब समाप्ति की ओर है, लेकिन कुछ लोगों के भीतर 'दिमागी नक्सल' की सोच मौजूद है। उन्होंने ऐसे लोगों को पहचानने और उन्हें अलग-थलग करने की जरूरत बताई थी।
सौरव दास ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जारी अपने एक अन्य संदेश में कहा कि देश में लोगों के भीतर का डर कम हो रहा है और नई पीढ़ी अपनी आवाज उठाने के लिए आगे आ रही है। उन्होंने शांतिपूर्ण विरोध और जागरूकता के नए दौर की बात कही।
'हर जिले में जन्म ले रहा नया जंतर-मंतर'
सौरव दास ने दावा किया कि देश के हर जिले में एक नया 'जंतर-मंतर' उभर रहा है। उनके मुताबिक, ये ऐसे स्थान होंगे जहां निराश लोगों को उम्मीद और कमजोर लोगों को एकजुट होने की ताकत मिलेगी। उन्होंने सत्ता पक्ष पर युवाओं और जेन-जी को बांटने का आरोप लगाते हुए कहा कि जनता की एकजुटता किसी भी ताकत से ज्यादा मजबूत होती है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)