150 साल बाद फिर गूंजा ‘वंदे मातरम’, लाल किले से राष्ट्रगान से पहले हुआ गायन
नई दिल्ली। 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से पहली बार ‘वंदे मातरम’ का गायन राष्ट्रगान से पहले किया गया। राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित समारोह में सेना के बैंड ने ‘वंदे मातरम’ की धुन प्रस्तुत की और उपस्थित लोगों ने राष्ट्रीय गीत का सामूहिक गायन किया। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और राष्ट्रगान हुआ।
1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित ‘वंदे मातरम’ स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष का प्रमुख स्वर बन गया था। 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध में हुए आंदोलनों के दौरान इसका व्यापक इस्तेमाल हुआ और धीरे-धीरे यह स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नारों में शामिल हो गया।
वंदे मातरम को 1950 में संविधान सभा ने भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया। हालांकि, सार्वजनिक और आधिकारिक आयोजनों में लंबे समय तक इसके शुरुआती दो छंदों का ही इस्तेमाल किया जाता रहा। इसके पीछे गीत के आगे के छंदों को लेकर विभिन्न समुदायों की आपत्तियां और राजनीतिक-सामाजिक विवाद प्रमुख कारण रहे।
वर्ष 2026 में राष्ट्रीय गीत को लेकर फिर व्यापक चर्चा शुरू हुई। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान के उपयोग को लेकर विस्तृत प्रोटोकॉल जारी किया, जिसके अनुसार यदि किसी कार्यक्रम में दोनों का गायन या वादन हो, तो पहले ‘वंदे मातरम’ और उसके बाद ‘जन गण मन’ प्रस्तुत किया जाएगा।
26 मार्च 2026 से आकाशवाणी ने भी अपने सुबह के प्रसारण में लंबे समय से इस्तेमाल किए जा रहे दो-छंद वाले संस्करण की जगह छह-छंद वाले संस्करण का प्रसारण शुरू किया। वहीं, 15 अगस्त 2026 को लाल किले से इसके गायन ने राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष के इतिहास को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया।
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