25 साल की सत्ता के बाद भी मुरैना में जल संकट कायम, वार्ड 20 के लोग बूंद-बूंद पानी को परेशान
(विवेक तिवारी)
मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में भीषण गर्मी के बीच जल संकट ने एक बार फिर नगर निगम और जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वार्ड क्रमांक 20 की सिंगल बस्ती और विरोधी वाली गली के निवासी पिछले करीब दस वर्षों से पीने के पानी की समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल सका है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि निगम की सत्ता बदली, अधिकारी बदले, महापौर और पार्षद बदले, लेकिन उनकी समस्या जस की तस बनी हुई है। हर चुनाव में बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही क्षेत्र की जनता को फिर पानी के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
नागरिकों का कहना है कि जिले और प्रदेश में लंबे समय से भाजपा की सरकार होने के बावजूद आज भी बड़ी आबादी जल संकट से परेशान है। लोगों का आरोप है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि जनता की मूलभूत समस्याओं की ओर ध्यान देने के बजाय सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी और योजनाओं के दावों तक सीमित हैं।
क्षेत्रवासियों ने नगर निगम पर विकास कार्यों में अनियमितताओं के आरोप भी लगाए हैं। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये विकास और सड़कों के नाम पर खर्च किए गए, लेकिन क्षेत्र में पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधा तक सुनिश्चित नहीं की जा सकी।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, गर्मी के मौसम में हालात और खराब हो जाते हैं। कई परिवारों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ता है, जबकि बरसात में भी जल निकासी और पेयजल व्यवस्था की समस्याएं बनी रहती हैं।
लोगों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि जल्द से जल्द क्षेत्र में स्थायी जल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि हर साल होने वाली इस परेशानी से राहत मिल सके।
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