भारत-US व्यापार समझौते के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा का राष्ट्रव्यापी अभियान, राज्यों से विशेष सत्र बुलाने की मांग
नई दिल्ली (आरएनआई)। प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ाने की रणनीति तैयार कर ली है। ‘मजबूत भारत के लिए मजबूत राज्य’ अभियान के तहत संगठन ने दो राष्ट्रव्यापी अभियानों की घोषणा करते हुए राज्यों से वित्तीय और नीतिगत अधिकारों की बहाली की मांग उठाई है।
एसकेएम ने कहा है कि उसकी राज्य और राष्ट्रीय समितियों के प्रतिनिधिमंडल देशभर में मुख्यमंत्रियों और विपक्ष के नेताओं से मुलाकात करेंगे। इन बैठकों के दौरान प्रस्तावित भारत-US व्यापार समझौते के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने के लिए विशेष विधानसभा सत्र बुलाने की मांग की जाएगी। किसान संगठन ने इसे ‘राष्ट्र-विरोधी’ करार देते हुए राज्यों से केंद्र सरकार को इस समझौते पर हस्ताक्षर न करने का आग्रह करने को कहा है।
संगठन ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को पद से हटाने की मांग भी उठाई है। एसकेएम का आरोप है कि किसानों के हितों की अनदेखी की जा रही है। साथ ही केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा राज्यों को गेहूं और धान पर बोनस भुगतान समाप्त करने संबंधी कथित पत्र को वापस लेने की भी मांग की गई है।
भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच इस महीने की शुरुआत में एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति बनी है, जिसके तहत अमेरिकी टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। इस रूपरेखा को कानूनी दस्तावेज का रूप देकर पहले चरण के द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने हैं।
एसकेएम ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) अधिनियम, 2017 में संशोधन कर राज्यों की कराधान शक्तियों को बहाल करने और केंद्रीय करों के विभाज्य कोष में राज्यों की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत तक बढ़ाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि संविधान के तहत कृषि राज्य का विषय है, इसलिए राज्यों को सभी फसलों के लिए ‘2+50 प्रतिशत’ फार्मूले पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी और सुनिश्चित खरीद का कानून बनाना चाहिए।
इसके अलावा एसकेएम ने चारों श्रम कानूनों और वीबीजीआरएएमजी अधिनियम को निरस्त करने, ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून को बहाल करने तथा किसानों और ग्रामीणों के लिए व्यापक कर्जमाफी लागू करने की भी मांग की है। संगठन का कहना है कि कर्ज और आत्महत्याओं की समस्या से निपटने के लिए ठोस और संरचनात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है।
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