होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का सख्त रुख, नए समुद्री मार्ग का उपयोग करने वाले जहाजों को दी चेतावनी
तेहरान। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले एक नए समुद्री मार्ग को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। ईरानी नौसेना ने स्पष्ट चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि उसकी अनुमति और समन्वय के बिना बनाए गए किसी भी नए जलमार्ग का उपयोग करने वाले जहाजों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
ईरान का कहना है कि कुछ पक्षों ने तेहरान को विश्वास में लिए बिना और आवश्यक समन्वय के बिना नया समुद्री मार्ग निर्धारित किया है। ईरानी नौसेना के अनुसार, केवल वही मार्ग वैध और अधिकृत माना जाएगा जिसे ईरान ने आधिकारिक रूप से स्वीकृत किया है। अधिकारियों ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक क्षेत्र में नौवहन से जुड़े नियमों का उल्लंघन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में ईरान की यह चेतावनी अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों और ऊर्जा बाजारों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इस बीच क्षेत्रीय तनाव से जुड़ी अन्य घटनाएं भी सामने आई हैं। इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में सैन्य अभियान के दौरान अपने एक सैनिक की मौत की पुष्टि की है। मृत सैनिक की पहचान 32 वर्षीय मेजर बासेल सुएद के रूप में की गई है।
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के एक स्कूल पर हुए मिसाइल हमले में अमेरिका की भूमिका संबंधी आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उस समय पूरे क्षेत्र में कई दिशाओं से मिसाइल हमले हो रहे थे, इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि हमला किस पक्ष द्वारा किया गया। उन्होंने घटना को दुखद बताते हुए कहा कि अब तक ऐसा कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है जो अमेरिकी जिम्मेदारी को साबित करता हो।
दूसरी ओर, अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने खाड़ी देशों को आश्वस्त किया है कि ईरान के साथ जारी वार्ताओं में उनके हितों की रक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता के लिए प्रयासरत है तथा अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा प्राथमिकता बनी रहेगी।
हाल के संघर्ष के दौरान ईरान द्वारा खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों के साथ-साथ होर्मुज जलडमरूमध्य में गतिविधियों को प्रभावित करने की घटनाओं ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी थीं। अब ईरान के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि वह इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर अपने प्रभाव और नियंत्रण को लेकर किसी भी तरह का समझौता करने के पक्ष में नहीं है।
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