स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर बड़ा खुलासा: यूपी में लाखों उपभोक्ताओं की बिजली देर से जुड़ी, मुआवजे की मांग तेज
अवधेश कुमार वर्मा
उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है, जहां उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग में पेश की गई रिपोर्ट ने पावर कॉरपोरेशन के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब तक कहा जा रहा था कि रिचार्ज के तुरंत बाद बिजली आपूर्ति बहाल हो जाती है, लेकिन आधिकारिक आंकड़ों से पता चला है कि बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा।
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड की ओर से दाखिल रिपोर्ट के मुताबिक 13 मार्च से 10 अप्रैल 2026 के बीच लाखों स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं के कनेक्शन नेगेटिव बैलेंस के कारण काटे गए। इनमें से बड़ी संख्या ने रिचार्ज तो कराया, लेकिन करीब 1.93 लाख उपभोक्ताओं की बिजली 2 घंटे की तय सीमा के बाद ही बहाल हो सकी। यह नियमों का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है, क्योंकि स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस रेगुलेशन 2019 के तहत 2 घंटे के भीतर आपूर्ति बहाल न होने पर मुआवजा देना अनिवार्य है।
इस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने कड़ा रुख अपनाया है। परिषद का कहना है कि रिपोर्ट में यह दावा करना कि किसी उपभोक्ता ने मुआवजा नहीं मांगा, तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक है। परिषद ने आरोप लगाया कि 1912 हेल्पलाइन पर मुआवजे की कोई पारदर्शी व्यवस्था नहीं है, जिससे उपभोक्ताओं को उनका अधिकार नहीं मिल पा रहा।
परिषद ने आयोग में लोक महत्व प्रस्ताव दाखिल कर मांग की है कि सभी प्रभावित उपभोक्ताओं को बिना आवेदन के स्वतः मुआवजा दिया जाए। ₹50 प्रति उपभोक्ता के हिसाब से यह मुआवजा कुल मिलाकर एक करोड़ रुपये से अधिक बैठता है। साथ ही स्मार्ट प्रीपेड मीटर प्रणाली की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने और दोषी एजेंसियों पर कार्रवाई की भी मांग उठाई गई है।
इस खुलासे के बाद प्रदेश में स्मार्ट मीटर की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं और यह मुद्दा लाखों उपभोक्ताओं से जुड़ा होने के कारण अब बड़ा जनहित का मामला बनता जा रहा है।
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