लखनऊ अग्निकांड: तारों के जाल, थर्माकोल और फाइबर की लापरवाही ने ली जानें, दमघोंटू धुएं में फंसे लोग
लखनऊ। (आरएनआई) अलीगंज सेक्टर-डी स्थित हैक्सार स्टूडियो में सोमवार को हुए भीषण अग्निकांड की जांच में कई गंभीर लापरवाहियां सामने आ रही हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, स्टूडियो की छत पर फैले बिजली के तारों का जाल, थर्माकोल और फाइबर से बनी कृत्रिम छत आग के दौरान सबसे बड़ा खतरा साबित हुई। इन ज्वलनशील सामग्रियों के जलने से निकले घने और जहरीले धुएं ने लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं दिया।
घटनास्थल पर पहुंचे पूर्व छात्र विश्वनाथ ने बताया कि जिस मंजिल पर वर्तमान में स्टूडियो संचालित हो रहा था, वहां पहले एक लाइब्रेरी चलती थी, जो करीब डेढ़ वर्ष पहले बंद हो गई थी। उन्होंने बताया कि उस समय भी पूरी छत पर बिजली के तारों का जाल फैला हुआ था, जिसे छिपाने के लिए थर्माकोल और फाइबर की फॉल्स सीलिंग बनाई गई थी। तारों में खराबी आने पर प्रशिक्षित तकनीशियन को बुलाने के बजाय संचालक स्वयं मरम्मत करता था।
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि स्टूडियो संचालन के दौरान भी यही व्यवस्था जारी रही। आशंका जताई जा रही है कि विद्युत फॉल्ट के बाद लगी आग ने थर्माकोल और फाइबर को तेजी से अपनी चपेट में ले लिया, जिससे कुछ ही मिनटों में पूरा परिसर धुएं से भर गया। दमघोंटू धुएं के कारण कई लोग बाहर निकलने में असफल रहे।
इस हादसे में जान गंवाने वाले 24 वर्षीय आदित्य श्रीवास्तव का मंगलवार को सीतापुर जिले के बिसवां में अंतिम संस्कार किया गया। पार्थिव शरीर घर पहुंचते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मां कल्पना श्रीवास्तव की चीख-पुकार और बेटे को वापस लौटाने की गुहार ने हर किसी की आंखें नम कर दीं। अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
आदित्य के परिजनों ने कहा कि उन्हें आर्थिक सहायता से अधिक निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की उम्मीद है। उनका कहना है कि किसी भी मुआवजे से उनके बेटे की भरपाई नहीं हो सकती, लेकिन इस हादसे के जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
हादसे में घायल हुए लोगों में शामिल भुवन श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंने खिड़की से कूदकर अपनी जान बचाई, लेकिन अपने ममेरे भाई आदित्य को नहीं बचा सके। घटना की याद आते ही वह भावुक हो गए और कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं दिखे।
इस बीच, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने मंगलवार को ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर घायलों से मुलाकात की। उन्होंने हादसे पर दुख जताते हुए कहा कि यदि सुरक्षा मानकों और अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन किया गया होता तो इतनी बड़ी त्रासदी टाली जा सकती थी। उन्होंने मांग की कि घायलों के इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाए तथा मृतकों के परिजनों को कम से कम एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।
फिलहाल प्रशासन और संबंधित एजेंसियां हादसे के कारणों की जांच में जुटी हैं। प्रारंभिक तथ्यों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि व्यावसायिक संस्थानों में अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी आखिर कब तक लोगों की जान लेती रहेगी।
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