मध्यप्रदेश सरकार पर बढ़ता कर्ज, इस वित्तीय वर्ष में 19वीं बार लेगी उधारी
भोपाल (आरएनआई) मध्यप्रदेश की Government of Madhya Pradesh पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदेश की Mohan Yadav के नेतृत्व वाली सरकार चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 19 बार उधार ले चुकी है और 10 मार्च को 5800 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने जा रही है। Reserve Bank of India के शेड्यूल के अनुसार यह इस वित्तीय वर्ष में लिया जाने वाला आखिरी कर्ज होगा।
जानकारी के अनुसार होली से पहले प्रदेश सरकार लगभग 6300 करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है। 10 मार्च को सरकार 1900 करोड़, 1700 करोड़ और 2200 करोड़ रुपये की तीन अलग-अलग किश्तों में उधार लेगी। इसके बाद इस वित्तीय वर्ष में प्रदेश द्वारा लिया गया कुल कर्ज करीब 85 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। वहीं राज्य पर कुल कर्ज बढ़कर लगभग 5 लाख 66 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो जाने का अनुमान है।
केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को पूंजीगत खर्च बढ़ाने के लिए 50 साल का ब्याज-मुक्त कर्ज उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी कारण कई राज्यों ने वित्तीय वर्ष की शुरुआत से ही ज्यादा उधारी ली है। मध्यप्रदेश में विभिन्न योजनाओं, उद्योग और कृषि क्षेत्र में निवेश के साथ-साथ पुराने कर्ज के मूलधन और ब्याज के भुगतान के लिए भी बड़ी राशि की आवश्यकता बताई जा रही है।
राजनीतिक हलकों में इस बढ़ती उधारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग इसे प्राचीन Charvaka दर्शन के उस प्रसिद्ध सिद्धांत से जोड़कर देख रहे हैं जिसमें कहा गया है— “यावज्जीवेत् सुखं जीवेत्, ऋणं कृत्वा घृतं पिबेत्”, अर्थात जब तक जियो सुख से जियो, कर्ज लेकर भी घी पियो। हालांकि सरकार का कहना है कि यह उधारी विकास कार्यों और निवेश के लिए आवश्यक है।
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