नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म मामले में दो दोषियों को आजीवन कारावास, पॉक्सो कोर्ट का सख्त फैसला
गुना(आरएनआई) गुना स्थित विशेष न्यायालय (पॉक्सो) ने नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म और सामूहिक यौन शोषण के चर्चित मामले में दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए कड़ी सजा सुनाई है। जिनमें से एक कुख्यात आरोपी जुड़ो कराटे का कोच रहा है जिसने विदेश में जाकर यह घिनौना अपराध किया है ।आरोपी दंपति लोगों को झूठा फंसा कर ब्लैकमेल करने के लिए भी कुख्यात हो चुके हैं।विशेष न्यायालय ने प्रकरण क्रमांक एससी-70/2022 में फैसला सुनाते हुए आरोपियों सचिन भटनागर और जगवीर जाटव को भारतीय दंड संहिता तथा पॉक्सो अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषसिद्ध पाया। न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों के बयान और अनुसंधान के आधार पर यह सिद्ध हुआ कि आरोपियों ने एक नाबालिग छात्रा के साथ गंभीर लैंगिक अपराध किया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष(डीपीओ हजारीलाल बैरवा,एडीपीओ ममता दीक्षित) ने घटना से जुड़े पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिन्हें न्यायालय ने विश्वसनीय मानते हुए दोषसिद्धि का आधार बनाया।
फैसले में न्यायालय ने कहा कि आरोपियों ने गुरु-शिष्य जैसे पवित्र संबंधों का दुरुपयोग करते हुए पीड़िता के विश्वास को ठेस पहुंचाई तथा उसके शारीरिक और मानसिक जीवन पर गंभीर प्रभाव डाला। न्यायालय ने इसे अत्यंत गंभीर अपराध मानते हुए कठोर दंड आवश्यक बताया।
शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक कारावास रहेगा*
दोषी सचिन भटनागर और जगवीर जाटव को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(एन) एवं 376(डी) के तहत 20-20 वर्ष के कठोर कारावास तथा अर्थदंड से दंडित किया गया। वहीं धारा 376(डीए) के अंतर्गत दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, जिसका अर्थ उनके शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक कारावास रहेगा। विभिन्न धाराओं के तहत लगाए गए अर्थदंड का भुगतान नहीं करने पर अतिरिक्त सश्रम कारावास भी भुगतना होगा।
न्यायालय ने आदेश दिया कि सभी मूल कारावास की सजाएं साथ-साथ चलेंगी। साथ ही पीड़िता को मानसिक आघात और अपराध से हुए नुकसान की भरपाई के लिए प्रतिकर (मुआवजा) प्रदान किए जाने संबंधी प्रावधानों का पालन करने के निर्देश भी दिए गए।
जेल भेजने के आदेश दिए*
फैसले के बाद न्यायालय ने दोनों दोषियों के विरुद्ध सजा वारंट जारी करने तथा नियमानुसार जेल भेजने के आदेश दिए। न्यायालय ने यह भी निर्देशित किया कि पीड़िता की पहचान गोपनीय रखी जाए और उससे संबंधित किसी भी जानकारी का प्रकाशन न किया जाए।
बाल संरक्षण और लैंगिक अपराधों के विरुद्ध न्यायिक सख्ती*
इस निर्णय को बाल संरक्षण और लैंगिक अपराधों के विरुद्ध न्यायिक सख्ती का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि नाबालिगों के साथ होने वाले यौन अपराध समाज के नैतिक मूल्यों पर गंभीर आघात हैं और ऐसे मामलों में कठोर दंड ही न्याय के उद्देश्य की पूर्ति कर सकता है।
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