चेतकपुरी नाले पर ‘खेला’! ACS के तेवर कलेक्टर की फुसफुसाहट के बाद पड़े ठंडे, इंजीनियर बच निकले
ग्वालियर (आरएनआई) नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे शुक्रवार को जब चेतकपुरी नाले में उतरकर नाले के बहाव को 90 डिग्री मोड़े जाने पर अच्छे-खासे नाराज हो रहे थे और भवन निर्माण अनुमति की फाइलें भी तलब कर लीं लेकिन अनुमति देने वाले इंजीनियरों को दाद देनी पड़ेगी कि उन्होंने ऐसा पेंतरा खेला कि न सिर्फ एसीएस चारों खाने चित हो गए बल्कि कार्रवाई करने के बजाय भीगी बिल्ली बनकर भागे। दरअसल जैसे ही मीटिंग में एसीएस ने नाले पर अनुमति की फाइल मांगी तो कलेक्टर मैडम ने उनके कान में कुछ फुसफुसाया बस यहीं से एसीएस के तेवर बदल गए। इसके पीछे सच्चाई यह निकली कि निलंबन के डर से एक बड़े इंजीनियर ने तत्काल रसूखदार कालोनाइजरों से संपर्क कर बताया कि आपकी जमीनो पर दी गई परमीशन निरस्त हो रही है, आगे हम कोई मदद नहीं कर पाएंगे। फिर क्या था कपूर और कुकरेजा सक्रिय हुए और ताना-बाना बुना कि यह अनुमति केंद्रीय मंत्री के कहने पर हुई है। कमिश्नर ने यह बात कलेक्टर को बताई तो कलेक्टर ने एसीएस को समझाया कि ग्वालियर में बड़े नेताओं की राजनीति चलती है इस विषय को रहने ही दें। वैसे कमिश्नर भी इसलिए बैकफुट पर रहकर इंजीनियरों का बचाव कर रहे थे क्योंकि सरकारी नाला निर्माण की अनुमति पर सहायक नगर निवेशक महेंद्र अग्रवाल की टीप लगी हुई है कि यह अनुमति निगमायुक्त के अनुमोदन पर दी गई है। यानिकी केंद्रीय मंत्री का नाम आगे कर ऊंचे-ऊंचे खेल कर रहे इंजीनियर रात में निलंबित होने से बच गए। इसका सीधा फायदा तीन बिल्डरों को हुआ। जो इस जमीन पर 20 हजार रुपए फीट में भूखंड बेच रहे हैं।
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