आधे-अधूरे फैसलों ने सरकार को घेरा, सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद भी नहीं हुई ठोस कार्रवाई
नई दिल्ली (आरएनआई)। कक्षा आठ की पाठ्यपुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ संबंधी अध्याय और यूजीसी के समानता नियम विवाद को लेकर शिक्षा मंत्रालय की कार्यशैली ने केंद्र सरकार को असहज स्थिति में ला खड़ा किया है। आलोचकों का कहना है कि मंत्रालय की उदासीनता और विलंबित प्रतिक्रिया ने महज दो महीनों में सरकार को दूसरी बार बैकफुट पर धकेल दिया है।
इस मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब Supreme Court of India ने न सिर्फ इसे न्यायपालिका की छवि पर प्रहार माना, बल्कि सरकार की ओर से की गई कार्रवाई को प्रतीकात्मक और लीपापोती करार दिया। शीर्ष अदालत ने संकेत दिया कि यदि समय रहते जिम्मेदारों के खिलाफ ठोस कदम उठाए जाते, बिक्री के लिए भेजी गई किताबों को वापस मंगाया जाता और डिजिटल प्लेटफॉर्म से संबंधित सामग्री हटाई जाती, तो विवाद इतना नहीं बढ़ता।
विवाद के बीच वरिष्ठ अधिवक्ता Kapil Sibal और Abhishek Manu Singhvi सहित कई विधि विशेषज्ञों ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी, जिससे संकेत मिल गया था कि मामला तूल पकड़ सकता है। इसके बावजूद मंत्रालय की ओर से त्वरित और स्पष्ट कार्रवाई नहीं की गई।
गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश Justice Surya Kant द्वारा मामले का स्वतः संज्ञान लेने और इसे न्यायपालिका पर हमला करार देने के बाद भी मंत्रालय की ओर से अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई दी। अदालत ने इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है और उस बैठक का ब्यौरा मांगा है जिसमें विवादास्पद अध्याय को पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया गया था। शीर्ष अदालत ने यह भी पूछा है कि उस बैठक में कौन-कौन उपस्थित थे और निर्णय प्रक्रिया क्या थी।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की ‘हेड्स मस्ट रोल’ जैसी टिप्पणी ने संकेत दिया कि जिम्मेदारी तय किए बिना मामला खत्म नहीं होगा। अदालत ने सभी तथ्यों के सामने आने के बाद कमेटी गठित करने की संभावना भी जताई है। ऐसे में अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस प्रकरण में पाठ्यक्रम निर्धारण से जुड़े अधिकारियों या समिति के सदस्यों की जवाबदेही तय होगी।
राजनीतिक और कानूनी हलकों में इस मुद्दे को सरकार और न्यायपालिका के संबंधों की कसौटी के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में शीर्ष अदालत की अगली सुनवाई और सरकार की प्रतिक्रिया इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगी?
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