अपराधियों के ‘सफेदपोश संरक्षकों’ पर भी हो कार्रवाई, तभी थमेगा जुआ-सट्टा और अपराध का नेटवर्क
सरकार। एक लिस्ट उनकी भी बनाई जाए, जो राजनीति की आड़ में जुआरी सटोरियों अपराधियों को संरक्षण देते हैं। अपराधियों को पुलिस द्वारा पकड़ लिए जाने पर उन्हें छोड़ने के लिए थानों में फोन लगाते हैं, उनकी सिफारिशें करते हैं।
जब तह में जाते हैं तो ध्यान में आता है कि लंबे समय से पनप रहे जुआरी सटोरियों ने किसी न किसी नेता का हाथ पकड़ रखा है। जिन्हें या तो वह नियमित रूप से हिस्सा देते हैं या उनका खर्च उठाते हैं। या फिर समय समय पर अपने नेता की झांकी जुलूस जमाने के लिए भीड़ इकट्ठी करते हैं। भीड़ के भूखे नेताओं के लिए इतना भी काफी है।
आईपीएल जो तमाम अपराधों की जड़ है, उसके जितने भी बड़े सटोरिए हैं आजकल उन्होंने पुलिस प्रशासन को गुमराह करने के लिए अलग अलग व्यापार की दुकानें व्यवसाय शुरू कर दी हैं। लेकिन उस दुकान और व्यवसाय पर वो खुद नहीं बैठते। ऐसे खाईबाजों, सटोरियों ने किसी न किसी नेता से लिंक भी बना रखी है। जब भी खाईवाल के गिरोह के किसी सदस्य पर पुलिस शिकंजा कसती है तो संबंधित नेता या उसके नजदीकी व्यक्ति थानों में फोन लगाते हैं। या किसी खास के साथ दस पांच लोगों को थाने भेजकर "सिस्टम" से छुड़ाने का प्रयास करते हैं।
यह बात अलग है कि पुलिस महकमे में, और पब्लिक डोमेन में नाम उजागर होने के बाद भी ऐसे निर्लज्ज नेताओं की सेहत और मोटी चमड़ी पर कोई फर्क नहीं पड़ता। केवल फोन कॉल के एवज में मिलने वाली प्रोटेक्शन मनी या प्रोटेक्शन फैसिलिटी लेने की आदत के आगे इज्जत क्या चीज है, वैसे भी सुख सुविधाएं तो पैसे से ही आती हैं, इज्जत अलग विषय है।
इसी तरह मौका मिलते ही समाज में अराजकता और वैमनस्यता फैलाने की कोशिश में जुटे रहने वाले असामाजिक तत्व भी किसी न किसी संगठन से जुड़ने लगे हैं। जिनका उद्देश्य कथित "सेवा" का प्रदर्शन कर "सेवी" होने का चोला ओढ़कर असामाजिक गतिविधियों में लिप्त रहना ही है। न तो इनके साथ समाज खड़ा होता और न ही समाज इन्हें सम्मानित मानता। इनका मकसद मौका मिलते ही खुद का भौकाल बनाना है।
इसलिए सरकार; यदि आपको प्रदेश में बढ़ते अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाना है, तो अपराधियों और असामाजिक तत्वों की पीठ पर जिस सफेदपोश का हाथ है उसे कमजोर करने के साथ साथ, उनकी जिला स्तर पर गोपनीय लिस्ट बनवाकर उन्हें भी ठांसने की जरूरत है। साथ ही बिना दवाब के अपराध पर अंकुश लगाने और अच्छा काम करने पर पुलिस को भी प्रोत्साहन देना जरूरी है।
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