सुप्रीम कोर्ट ने BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा की शक्तियां सीमित कीं, कहा- ‘लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित चेयरमैन नहीं’
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार, 2 सितंबर को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के पद और अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने स्पष्ट किया कि नई BCI के पदाधिकारियों के चुनाव होने तक मनन कुमार मिश्रा केवल प्रो-टेम यानी अस्थायी चेयरमैन के रूप में काम कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि उनकी स्थिति लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित नियमित चेयरमैन जैसी नहीं है।
चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे, ने कहा कि मिश्रा फिलहाल BCI के रोजमर्रा के प्रशासनिक कामकाज को संभाल सकते हैं, लेकिन बड़े नीतिगत फैसले अकेले नहीं ले सकते।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों में भारत के अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल को शामिल किया जाए। दोनों BCI के स्थायी पदेन सदस्य हैं। अदालत के मुताबिक, रोजमर्रा के कामकाज में उनकी भागीदारी जरूरी नहीं होगी, लेकिन नीति से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में उनकी मौजूदगी और राय सुनिश्चित की जानी चाहिए।
यह मामला मनन कुमार मिश्रा के कार्यकाल को चुनौती देने वाली याचिकाओं से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने BCI नियमों के तहत चेयरमैन के निर्धारित कार्यकाल और अप्रैल 2025 की उस अधिसूचना पर सवाल उठाए हैं, जिसमें मिश्रा का कार्यकाल आगे बढ़ाए जाने की बात कही गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल उन्हें पद से हटाने का आदेश देने के बजाय नई BCI के गठन और चुनाव की प्रक्रिया को जल्द पूरा कराने पर जोर दिया
अदालत ने राज्य बार काउंसिलों के पुनर्गठन और चुनाव की प्रक्रिया के लिए भी समयसीमा तय की है, ताकि उनके प्रतिनिधियों के जरिए नई BCI का गठन हो सके। मामले में अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी।
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