कामाख्या कॉरिडोर पर सवाल: साधकों ने कोर्ट में उठाया प्राकृतिक जलधारा के अस्तित्व का मुद्दा, सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
असम के गुवाहाटी स्थित कामाख्या मंदिर में चल रहे कॉरिडोर निर्माण को लेकर विवाद सामने आया है। मंदिर से जुड़ी प्राकृतिक जलधारा और निर्माण कार्य के संभावित प्रभाव को लेकर कुछ साधकों ने अदालत का रुख किया है। उनका कहना है कि कॉरिडोर के निर्माण से पहले क्षेत्र की जलधारा और भूगर्भीय स्थिति का पर्याप्त अध्ययन किया जाना जरूरी था।
कामाख्या मंदिर में देवी के दर्शन से जुड़ी प्रमुख धार्मिक परंपराओं में प्राकृतिक जलधारा का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु मंदिर परिसर में स्थित गुफानुमा स्थान पर पहुंचकर जलधारा का स्पर्श करते हैं। साधकों का दावा है कि यही प्राकृतिक जल प्रवाह मां कामाख्या और उनसे जुड़े शक्ति स्वरूपों की धार्मिक मान्यता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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साधकों की चिंता कामाख्या एक्सेस कॉरिडोर के निर्माण को लेकर है। उनका कहना है कि पहाड़ी क्षेत्र में खुदाई, निर्माण या अन्य गतिविधियों से प्राकृतिक जलधारा प्रभावित हो सकती है। इससे जल का प्रवाह कम होने, सूखने या अपना रास्ता बदलने की आशंका जताई गई है।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, कॉरिडोर परियोजना से पहले जलधारा की स्थिति का विस्तृत हाइड्रोलॉजिकल अध्ययन नहीं कराया गया था। अदालत में मामला पहुंचने के बाद जल प्रवाह और भूगर्भीय स्थिति का अध्ययन कराने की प्रक्रिया शुरू हुई।
सर्वे के लिए संस्था के चयन को लेकर भी याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाए। उनका दावा है कि शुरुआत में जिस संस्था को जिम्मेदारी दी गई थी, वह हाइड्रोलॉजिकल सर्वे के बजाय वाटर हार्वेस्टिंग से जुड़ी थी। आपत्ति के बाद दूसरी संस्था का चयन किया गया, लेकिन रिपोर्ट तैयार करने में अधिक समय लगने की बात सामने आई। इसके बाद सरकार ने एक अन्य संस्था से सर्वे कराया।
अब विवाद सर्वे रिपोर्ट को लेकर है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि रिपोर्ट तैयार हो चुकी है, लेकिन उन्हें इसकी प्रति उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। उनका तर्क है कि यदि रिपोर्ट में कॉरिडोर निर्माण से प्राकृतिक जलधारा पर कोई खतरा नहीं बताया गया है तो उसे सार्वजनिक करने में आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
साधकों ने अदालत के माध्यम से सरकार से रिपोर्ट सामने रखने और निर्माण कार्य से पहले प्राकृतिक जलधारा की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि कामाख्या मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि देश की महत्वपूर्ण शक्ति उपासना परंपरा का केंद्र है, इसलिए विकास कार्यों के साथ इसकी प्राकृतिक और धार्मिक संरचना की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
हालांकि, कॉरिडोर परियोजना और हाइड्रोलॉजिकल सर्वे को लेकर लगाए गए आरोपों पर सरकार का आधिकारिक पक्ष और सर्वे रिपोर्ट की वास्तविक सामग्री सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि निर्माण से प्राकृतिक जलधारा पर वास्तव में कितना प्रभाव पड़ने की संभावना है।
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