छात्र आंदोलनों के समर्थन में एकजुट हो विपक्ष, AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने की अपील
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने विपक्षी दलों से देश के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे छात्र आंदोलनों के समर्थन में एकजुट होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सांसदों की जिम्मेदारी केवल संसद तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें जमीन पर उठ रही जनता और छात्रों की आवाज को भी मजबूती से उठाना चाहिए।
नेहा बोरा ने झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन और हैदराबाद स्थित NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के छात्रों के मुद्दे पर विपक्ष से समर्थन देने की मांग की। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को छात्रों की मांगों को संसद और सड़क, दोनों जगह मजबूती से उठाना चाहिए।
झारखंड में छात्र और नौकरी के अभ्यर्थी 25 जुलाई से जेपीएससी-जेएसएससी मंच के बैनर तले आंदोलन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार, कुछ परीक्षाओं को रद्द करना और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच शामिल है।
प्रदर्शनकारी छात्र कथित अनियमितताओं की जांच सीबीआई से कराने या राज्य के बाहर के सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीशों की समिति गठित करने की मांग भी कर रहे हैं। नेहा बोरा ने विपक्षी दलों से इन मांगों को राजनीतिक मंचों पर उठाने की अपील की है।
NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के छात्रों का मुद्दा भी नेहा बोरा ने उठाया। विश्वविद्यालय के एक वर्ग के छात्रों ने जुलाई में कुलपति, रजिस्ट्रार और प्रोफेसरों को पत्र लिखकर दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को बुलाने के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई थी। बोरा ने विपक्ष से इन छात्रों के साथ भी एकजुटता दिखाने की अपील की।
इसके अलावा उन्होंने इंग्लिश एंड फॉरेन लैंग्वेजेज यूनिवर्सिटी (EFLU) के छात्रों का मुद्दा भी उठाया। 14 अगस्त को विश्वविद्यालय परिसर में एबीवीपी और एनएसयूआई से जुड़े छात्रों के बीच झड़प हुई थी, जिसमें कई छात्रों के घायल होने की बात सामने आई थी। इस मामले में शिकायतें भी दर्ज की गई थीं।
नेहा बोरा ने अपने 23 दिन के भूख हड़ताल के अनुभव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर हुआ आंदोलन केवल नीट पेपर लीक के मुद्दे तक सीमित नहीं था, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और बेरोजगारी से जुड़े व्यापक सवालों को भी सामने लाने का प्रयास था।
उन्होंने कहा कि युवाओं में मौजूदा व्यवस्था को लेकर असंतोष बढ़ रहा है और देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्र अपने अधिकारों और पारदर्शी व्यवस्था की मांग को लेकर आवाज उठा रहे हैं। ऐसे में विपक्षी दलों को इन आंदोलनों के साथ खड़े होकर छात्रों की आवाज को संसद और सार्वजनिक मंचों तक पहुंचाना चाहिए।
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