सिलीगुड़ी में जनजाति मार्च पर लाठीचार्ज, कई घायल; 16 हिरासत में
सिलीगुड़ी (आरएनआई)। उत्तर बंगाल के Siliguri में गुरुवार को जनजाति सुरक्षा मंच के ‘उत्तरकन्या अभियान’ के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब पुलिस ने मार्च को रोकने के लिए लाठीचार्ज कर दिया। इस घटना में कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए, जबकि कम से कम 16 लोगों को हिरासत में लिया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछले सप्ताह सिलीगुड़ी महकमा परिषद के फांसीदेवा क्षेत्र में जमीन विवाद को लेकर तनाव पैदा हुआ था। आरोप है कि विवाद के दौरान एक आदिवासी गर्भवती महिला के साथ मारपीट की गई। बाद में महिला ने बच्चे को जन्म दिया, किंतु नवजात की मृत्यु हो गई। इसी घटना के विरोध में जनजाति सुरक्षा मंच ने ‘उत्तरकन्या अभियान’ का आह्वान किया था, जिसे Bharatiya Janata Party का समर्थन भी प्राप्त था।
गुरुवार को जलपाई मोड़ से उत्तरकन्या, जो उत्तर बंगाल का राज्य सचिवालय है, की ओर मार्च निकाला गया। इस मार्च में डाबग्राम-फूलबाड़ी की विधायक शिखा चट्टोपाध्याय और फांसीदेवा के विधायक दुर्गा मुर्मू भी शामिल थे। तीनबत्ती मोड़ पर पुलिस ने जुलूस को आगे बढ़ने से रोक दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रोकने के बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी बहस हुई, जो धीरे-धीरे धक्का-मुक्की में बदल गई।
स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया। इस दौरान कई लोग घायल हो गए। पुलिस ने मौके से 16 लोगों को हिरासत में लिया है।
घटना के बाद भाजपा नेताओं ने पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताया। वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बिना अनुमति सचिवालय की ओर बढ़ रहे जुलूस को रोकना आवश्यक था और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए न्यूनतम बल का प्रयोग किया गया। फिलहाल क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
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