बंगाल एसआईआर पर हाई कोर्ट सख्त, झारखंड-ओडिशा से 100-100 न्यायिक अधिकारियों की मांग
कोलकाता (आरएनआई)। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर न्यायिक निगरानी और कड़ी हो गई है। Calcutta High Court ने प्रक्रिया को समयबद्ध और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से झारखंड और ओडिशा से 100-100 अतिरिक्त न्यायिक अधिकारियों की मांग की है। अदालत के इस कदम को मतदाता सूची से जुड़े कार्य की संवेदनशीलता के मद्देनजर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार लंबित मामलों की संख्या अधिक होने से मौजूदा न्यायिक तंत्र पर दबाव बढ़ गया था। पहले ही Supreme Court of India ने आवश्यकता पड़ने पर पड़ोसी राज्यों और सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों की सेवाएं लेने की अनुमति दी थी। उसी आधार पर हाई कोर्ट ने अतिरिक्त अधिकारियों की मांग की है, ताकि संशोधन कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरा हो सके।
इस मुद्दे पर मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल की अध्यक्षता में लगभग डेढ़ घंटे तक उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती, मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल, पुलिस महानिदेशक पीयूष पांडे, कोलकाता पुलिस आयुक्त सुप्रतिम सरकार और विशेष पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में एसआईआर की प्रगति, लंबित मामलों और तथ्यगत विसंगतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
अब तक कुल 532 न्यायिक अधिकारियों की तैनाती की जा चुकी है, जिनमें से 273 अधिकारी सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। लंबित मामलों के कारण अतिरिक्त अधिकारियों की आवश्यकता महसूस की गई। झारखंड और ओडिशा से 100-100 अधिकारियों के लिए औपचारिक अनुरोध भेजा गया है। साथ ही आने वाले अधिकारियों के ठहरने और भोजन की व्यवस्था पर भी प्रारंभिक निर्णय लिए गए हैं।
बैठक में यह भी तय किया गया कि 21 फरवरी की मध्यरात्रि तक उपलब्ध ‘तथ्यगत असंगतियों’ से संबंधित आंकड़ों को ही अंतिम आधार माना जाएगा। चुनाव आयोग उसी आधार पर आधिकारिक संख्या जारी करेगा। शेष न्यायिक अधिकारियों को शीघ्र लॉग-इन पहचान संख्या उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है, ताकि तकनीकी विलंब समाप्त हो और कार्य की गति बढ़े।
दस्तावेज अपलोड को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। 14 फरवरी तक जमा किए गए किंतु पोर्टल पर अपलोड नहीं हुए दस्तावेजों को निर्धारित समय सीमा में अपलोड किया जाएगा। विधानसभा-वार तैनात न्यायिक अधिकारी प्रतिदिन अपनी प्रगति रिपोर्ट चुनाव आयोग के माध्यम से हाई कोर्ट को भेजेंगे, जिससे प्रक्रिया पर सीधी न्यायिक निगरानी बनी रहे।
सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि 28 फरवरी तक उपलब्ध कार्य के आधार पर मतदाता सूची प्रकाशित की जाए, जबकि शेष कार्य चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा सकता है। हाई कोर्ट की सक्रियता के बाद अब प्रशासन और चुनाव आयोग पर तय समय सीमा में प्रक्रिया पूरी करने का दबाव और बढ़ गया है।
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