सुप्रीम कोर्ट का तल्ख सवाल- 'माफिया के पास आधुनिक हथियार और सरकार के पास बहाने?' खनन न रुका तो लगेगा पूर्ण प्रतिबंध

Friday, April 17, 2026 - 20:55
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सुप्रीम कोर्ट का तल्ख सवाल- 'माफिया के पास आधुनिक हथियार और सरकार के पास बहाने?' खनन न रुका तो लगेगा पूर्ण प्रतिबंध

नई दिल्ली (आरएनआई) सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश सरकार के उस तर्क को चौंकाने वाला और चिंताजनक बताया, जिसमें राज्य सरकार ने कहा था कि उसके वन अधिकारियों के पास रेत माफिया के आधुनिक हथियारों का मुकाबला करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। न्यायालय ने कहा कि राज्य को लाचार होने का दावा करने या अपनी ही कमियों का सहारा लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती, खासकर तब जब यही कमियां अवैध गतिविधियों, हिंसा, मानव जीवन की हानि और गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजातियों के आवासों के अपरिवर्तनीय विनाश को बढ़ावा देती हों। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन और संकटग्रस्त जलीय जीवों पर खतरे से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले में दी। अदालत ने कहा कि यह बेहद चिंताजनक है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण के समक्ष दाखिल हलफनामे में मध्य प्रदेश सरकार ने स्वीकार किया कि वन अधिकारियों के पास रेत माफिया से निपटने के लिए पर्याप्त हथियार और उपकरण नहीं हैं, जबकि माफिया आधुनिक हथियारों और वाहनों से लैस हैं।

एमपी और राजस्थान सरकार की आलोचना की

पीठ ने कहा कि यह खुलासा न केवल निष्क्रियता को सही ठहराता है, बल्कि राज्य तंत्र की चौंकाने वाली तैयारी की कमी और अवैध खनन से निपटने की इच्छाशक्ति के अभाव को भी उजागर करता है। अदालत ने मध्य प्रदेश और राजस्थान सरकारों की आलोचना करते हुए कहा कि यह उनके संवैधानिक कर्तव्यों कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अवैध गतिविधियों को रोकने के प्रति स्पष्ट उदासीनता को दर्शाता है, जिसका व्यापक जनहित और पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। कोर्ट ने कहा कि प्रवर्तन एजेंसियों को पर्याप्त संसाधन और सुरक्षा उपलब्ध न कराना शासन और कानून के राज की जड़ पर प्रहार करता है। इससे अपराधियों का मनोबल बढ़ता है और जनता का भरोसा कमजोर होता है। अदालत ने कहा कि अवैध रेत खनन को रोकने के लिए सबसे पहला कदम निगरानी और सर्विलांस सिस्टम को मजबूत करना होना चाहिए। इसके लिए तकनीक आधारित, समन्वित और रियल-टाइम मॉनिटरिंग व्यवस्था जरूरी है।

अदालत ने चेतावनी भी दी

पीठ ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण 2022 से इस मुद्दे से जूझ रहा है, लेकिन अब तक कोई खास सफलता नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने 2 अप्रैल को इस मामले को अपने पास स्थानांतरित कर लिया था। कोर्ट ने अभयारण्य में अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने समेत कई निर्देश दिए। साथ ही मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से प्रभावी कदम उठाने को कहा, अन्यथा अर्धसैनिक बलों की तैनाती जैसे कड़े आदेश दिए जा सकते हैं। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो मध्य प्रदेश और राजस्थान में रेत खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जा सकता है और राज्यों पर भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई 11 मई को होगी।

क्यों खास है चंबल अभयारण्य?

बता दें कि राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य लगभग 5400 वर्ग किलोमीटर में फैला एक संरक्षित क्षेत्र है, जहां घड़ियाल, लाल मुकुट कछुआ और गंगा डॉल्फिन जैसी संकटग्रस्त प्रजातियां पाई जाती हैं। यह अभयारण्य राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर चंबल नदी के किनारे स्थित है।

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