सियासी सफर में लगातार झटके: नरोत्तम मिश्रा का राजनीतिक ग्राफ क्यों गिरा?
दतिया (आरएनआई) नरोत्तम मिश्रा का राजनीतिक ग्राफ पिछले कुछ वर्षों में लगातार नीचे आया है। कभी उन्हें मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे मजबूत दावेदारों में गिना जाता था,लेकिन 2023 के विधानसभा चुनाव में दतिया सीट से हार के बाद पूरा राजनीतिक परिदृश्य बदल गया।
उनकी हार का सबसे बड़ा कारण उनके कथित अहंकार और अभिमान को माना गया। कांग्रेस ने इस बार भी चुनाव में नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ इसी मुद्दे को प्रमुखता से उठाना शुरू किया था।और बिना घोषित हुए ही खुद को प्रत्याशी मानते हुए नरोत्तम मिश्रा ने सार्वजनिक मंचों से कहना शुरू किया कि हमारी कोई भी गलती हो सुधारेंगे, ईमानदारी से आपके सामने झुककर आएंगे, अपनी आचार, विचार, व्यवहार सुधारेंगे भी सुधारेंगे। आप बैठोगे हम खड़े रहेंगे, इससे ऐसा माहौल बनने लगा था कि पार्टी ने उन्हें हरी झंडी दे दी है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
विधानसभा चुनाव हारने के बाद मुख्यमंत्री बनने की चर्चा खत्म हो गई। इसके बाद लोकसभा चुनाव में उनका नाम चला, टिकट नहीं मिला। राज्यसभा के लिए चर्चा हुई, वहां भी मौका नहीं मिला। प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की अटकलें भी लगीं,लेकिन जिम्मेदारी नहीं मिली।
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