सरकारी भूमि पर ‘श्री जी फार्म हाउस’ का कब्जा, अधिकारियों पर PMO को गुमराह करने का आरोप कार्यवाही  के आदेश कागजों में कैद

Wednesday, April 15, 2026 - 11:45
Updated: 4 months ago
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सरकारी भूमि पर ‘श्री जी फार्म हाउस’ का कब्जा, अधिकारियों पर PMO को गुमराह करने का आरोप कार्यवाही  के आदेश कागजों में कैद

हाथरस (आरएनआई) शिकायतकर्ता ने दिल्ली तक लड़ाई ले जाने का किया ऐलान श्री जी फार्म हाउस  हाथरस। जिले में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे और प्रशासनिक मिलीभगत का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। स्थानीय निवासी राजीव वार्ष्णेय ने प्रधानमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में श्री जी फार्म हाउस द्वारा किए गए अतिक्रमण और उसे संरक्षण देने वाले अधिकारियों के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।शिकायतकर्ता का आरोप है कि स्थानीय अधिकारियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भ्रामक और गलत रिपोर्ट भेजकर पूरे मामले को दबाने की कोशिश की है। इसे उन्होंने न सिर्फ पद का दुरुपयोग बताया, बल्कि देश की सर्वोच्च संस्था को गुमराह करने जैसा गंभीर अपराध भी करार दिया है। ज्ञापन में ऐसे अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि लोक निर्माण विभाग (PWD) खुद स्वीकार कर चुका है कि श्री जी फार्म हाउस द्वारा निर्धारित 60 फुट सड़क चौड़ाई के बजाय 50 फुट की दूरी पर निर्माण कर सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किया गया है। इसके बावजूद अब तक न तो अवैध निर्माण हटाया गया और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई हुई, जिससे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।राजीव वार्ष्णेय का कहना है कि जिलाधिकारी द्वारा पूर्व में कार्रवाई के आदेश दिए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई असर नहीं दिखा। उनका आरोप है कि भ्रष्ट तंत्र के चलते आदेश फाइलों में ही दबकर रह गए हैं और अतिक्रमण जस का तस बना हुआ है।ज्ञापन में मांग की गई है कि ‘श्री जी फार्म हाउस’ के अवैध निर्माण को तत्काल ध्वस्त कर सरकारी भूमि को कब्जा मुक्त कराया जाए और पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कर जिम्मेदार लोगों की भूमिका उजागर की जाए।शिकायतकर्ता ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे इस मामले को लेकर दिल्ली तक आंदोलन करेंगे। फिलहाल यह प्रकरण प्रशासन के लिए बड़ी परीक्षा बनता जा रहा है, जहां अब देखना होगा कि जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है या मामला यूं ही ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है!

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