सरकारी उपलब्धियों के मैसेज के लिए मांगी गई निजी जानकारी, कांग्रेस ने बताया डेटा प्राइवेसी का उल्लंघन
केरल (आरएनआई) केरल में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनधारकों की निजी जानकारी मांगे जाने को लेकर सियासत गरमा गई है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि चुनावी प्रचार के उद्देश्य से सरकारी उपलब्धियों के मैसेज भेजने के लिए कर्मचारियों की निजी जानकारी जुटाई जा रही है, जो साफ तौर पर डेटा प्राइवेसी का उल्लंघन है।
रमेश चेन्निथला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष कर्तव्य पर तैनात एक अधिकारी (OSD) ने विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों और पेंशनधारकों की निजी जानकारियां मांगी थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें न केवल कर्मचारियों का डेटा शामिल है, बल्कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के मालिकों की निजी जानकारी भी मांगी गई। चेन्निथला के अनुसार, यह जानकारी KSMART सिस्टम और SPARK प्लेटफॉर्म से एकत्र करने की कोशिश की गई।
उन्होंने बताया कि OSD की ओर से 31 दिसंबर 2025 को एक पत्र जारी किया गया था, जिसमें 12 फरवरी तक यह विवरण उपलब्ध कराने को कहा गया। चेन्निथला ने सवाल उठाया कि क्या मुख्यमंत्री की जानकारी या मंजूरी के बिना ऐसा पत्र जारी किया जा सकता है। उन्होंने इसे एक बड़ी राजनीतिक साजिश करार देते हुए कहा कि माकपा और एलडीएफ द्वारा राजनीतिक कैंपेन के लिए निजी जानकारी का इस्तेमाल करना गैरकानूनी और अलोकतांत्रिक है।
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि पत्र के मुताबिक यह डेटा एक डिजिटल कम्युनिकेशन सिस्टम के तहत जुटाया जा रहा था, जिसे ‘सरकारी सेवाओं के लिए सेंट्रलाइज्ड नोटिफिकेशन हब’ के रूप में लॉन्च किया जाना है और जिस पर सूचना एवं जनसंपर्क विभाग काम कर रहा है।
इस मुद्दे पर एक दिन पहले केरल हाईकोर्ट ने भी गंभीर चिंता जताई थी। मलप्पुरम के एक कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रशीद अहमद और तिरुवनंतपुरम सचिवालय में क्लेरिकल असिस्टेंट अनिल कुमार के.एम. की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा था कि सीएमओ की ओर से कथित तौर पर भेजे गए ईमेल और मैसेज, जिनमें राज्य सरकार की उपलब्धियों का प्रचार किया जा रहा है, निजता में दखल का मामला बनते हैं और यह चुनावी कैंपेन जैसा प्रतीत होता है।
हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद राज्य सरकार ने आश्वासन दिया है कि वह मामले की अगली सुनवाई तक, यानी 27 फरवरी तक, इस तरह के कोई भी मैसेज नहीं भेजेगी। इस पूरे प्रकरण ने केरल में चुनाव से पहले डेटा प्राइवेसी और सरकारी संसाधनों के कथित दुरुपयोग पर नई बहस छेड़ दी है।
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