तृणमूल की मुश्किलें बढ़ीं: राज्यसभा में और इस्तीफों की चर्चा, समानांतर संगठन भी हुआ सक्रिय
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के सामने राजनीतिक और संगठनात्मक चुनौतियां लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। विधानसभा चुनाव के बाद शुरू हुए राजनीतिक घटनाक्रम के बीच अब राज्यसभा में पार्टी के और सांसदों के इस्तीफे की चर्चाओं ने नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। वहीं, ऋतव्रत बनर्जी गुट भी समानांतर संगठन तैयार कर अपनी राजनीतिक सक्रियता तेज कर रहा है।
हाल ही में तृणमूल कांग्रेस के तीन राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया था। इसी बीच अब राज्यसभा सदस्य रुक्मणी मलिक के भी इस्तीफे की चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यसभा के उपसभापति को ई-मेल के माध्यम से भेजा है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि राज्यसभा के कुछ अन्य सांसद भी आने वाले दिनों में पार्टी छोड़ सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, तृणमूल के शेष नौ राज्यसभा सांसदों में से दो और सदस्य नई राजनीतिक राह चुन सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो उच्च सदन में पार्टी का संख्या बल और प्रभाव दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
उधर, ऋतव्रत बनर्जी गुट ने संगठनात्मक स्तर पर अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। ममता बनर्जी को चेयरपर्सन पद से हटाने और नई वर्किंग कमेटी के गठन के बाद अब यह गुट राज्य और जिला स्तर की समितियों के गठन में जुटा है। कोलकाता के तपसिया स्थित एक रिसॉर्ट में आयोजित बैठक में संगठन के विभिन्न पदों पर नियुक्तियों को अंतिम रूप दिए जाने की चर्चा है। सूत्रों के अनुसार, कई विधायक, पार्षद, पूर्व जनप्रतिनिधि और विधानसभा चुनाव लड़ चुके नेताओं को भी नई जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं।
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