जयशंकर का पश्चिम पर तंज: बोले- वैश्विक बढ़त खोने का दर्द नहीं पचा पा रहीं कुछ ताकतें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दक्षिण कोरिया के जेजू फोरम में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में आ रहे बदलावों पर अपनी बात रखते हुए पश्चिमी देशों पर परोक्ष निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कुछ स्थापित वैश्विक ताकतें अपनी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त में आई कमी को स्वीकार नहीं कर पा रही हैं। इसी वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था को ‘जीरो-सम गेम’ की तरह देखा जा रहा है, जहां एक देश की प्रगति को दूसरे का नुकसान माना जाता है।
जयशंकर ने कहा कि गैर-बाजार कारकों के जरिए वैश्विक अर्थव्यवस्था के स्वाभाविक विकास में बाधाएं पैदा की जा रही हैं, जिससे विकासशील देशों की औद्योगिक क्षमता और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि दुनिया अब एकध्रुवीय नहीं रही, बल्कि अलग-अलग शक्ति केंद्रों में बंट रही है। हालांकि, यह बदलाव वैश्विक व्यवस्था को अधिक संतुलित और लोकतांत्रिक बनाने की दिशा में भी एक अवसर है।
उन्होंने कहा कि महामारी, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियां किसी सीमा में नहीं बंधतीं, इसलिए इनसे निपटने के लिए वैश्विक सहयोग अनिवार्य है। साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कुछ देशों के हितों को प्राथमिकता देने से व्यापक अंतरराष्ट्रीय समुदाय प्रभावित होता है, जिसे बेहतर सहयोग के माध्यम से संतुलित किया जाना चाहिए।
इससे पहले सियोल में जयशंकर ने चो ह्यून से मुलाकात कर व्यापार, निवेश, रक्षा, तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा और सांस्कृतिक सहयोग समेत कई अहम क्षेत्रों में द्विपक्षीय साझेदारी की समीक्षा की।
तकनीक के बढ़ते महत्व का जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा कि आज तकनीक, व्यापार और सप्लाई चेन के जरिए दुनिया पहले से अधिक जुड़ी हुई है, लेकिन प्रतिस्पर्धा भी तेज हो गई है। उन्होंने कहा कि तकनीकी क्षेत्र अब रणनीतिक हितों का अखाड़ा बन चुका है और जब नियम निष्पक्ष नहीं होते, तो वैश्विक भरोसा कमजोर पड़ने लगता है।
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