कानपुर में पुलिस की बड़ी लापरवाही: बेगुनाह युवक को 'रेपिस्ट' बताकर 5 साल जेल भेजा, कोर्ट ने किया बरी; जांच के आदेश
कानपुर के बिधनू थाना क्षेत्र में नाबालिग से दुष्कर्म के एक मामले में पुलिस की गंभीर लापरवाही सामने आई है। अदालत ने पाया कि वास्तविक आरोपी को गिरफ्तार करने के बजाय पुलिस ने एक निर्दोष युवक को आरोपी बताकर वर्ष 2021 से जेल में बंद रखा। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) पवन कुमार राय की अदालत ने अमीन लायल को ससम्मान बरी करते हुए उसकी तत्काल रिहाई के आदेश दिए हैं। साथ ही मामले की जांच कर जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय और दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश भी जारी किए हैं।
मामला 25 मई 2021 का है, जब एक अधिवक्ता ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी 13 वर्षीय बेटी गैस सिलेंडर भरवाने गई थी, जहां कथित तौर पर 'विक्की' नामक युवक उसे झाड़ियों में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। मामले की जांच तत्कालीन थानाध्यक्ष एवं विवेचक उपनिरीक्षक विनोद कुमार सिंह को सौंपी गई थी।
अदालत के अनुसार, जांच के दौरान बिना किसी शिनाख्त परेड या ठोस पहचान के पुलिस ने कैंट क्षेत्र निवासी अमीन लायल को गिरफ्तार कर लिया और दस्तावेजों में उसे 'विक्की लायल उर्फ अमीन लायल' दर्शाते हुए मुख्य आरोपी बना दिया। इस त्रुटिपूर्ण जांच के चलते अमीन लायल लगभग पांच वर्षों तक जेल में बंद रहा।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पुलिस की जांच में गंभीर खामियां थीं और एक निर्दोष व्यक्ति को गलत तरीके से आरोपी बनाया गया। इसके बाद अदालत ने अमीन लायल को दोषमुक्त घोषित करते हुए उसकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया।
कोर्ट ने अपने आदेश की प्रति पुलिस आयुक्त और जिलाधिकारी कानपुर नगर को भेजते हुए तत्कालीन विवेचक उपनिरीक्षक विनोद कुमार सिंह तथा मामले की निगरानी करने वाले वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच कर उनके खिलाफ आवश्यक विभागीय और दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
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