नेपाल में बाढ़ की तबाही से टूटा सड़क संपर्क, 41 पुल ध्वस्त; 18 ही सुरक्षित बचे
काठमांडू। नेपाल में 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ के बाद अब राहत और बचाव के साथ-साथ सड़क संपर्क बहाल करना बड़ी चुनौती बन गया है। बाढ़ और भूस्खलन से कई इलाकों में सड़कें और पुल पूरी तरह तबाह हो गए हैं। प्रभावित समुदायों तक पहुंचने के लिए लोगों को घंटों पैदल चलना पड़ रहा है।
नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीआरआरएमए) के अनुसार, सोमवार तक आपदा में 1,356 लोगों की मौत हो चुकी थी, जबकि 4,994 लोग लापता बताए गए। अब तक 13,396 लोगों को बचाया जा चुका है।
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के खिसकने से आई बाढ़ ने भोटेकोशी नदी के बहाव को तेज कर दिया। इससे उत्तरी और मध्य नेपाल में बड़ी तबाही हुई। कई घर, वाहन, सड़कें और पुल बह गए, जबकि पनबिजली परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है।
भारत और चीन से मांगे अस्थायी पुल
बाढ़ से कटे इलाकों को दोबारा जोड़ने के लिए नेपाल ने भारत और चीन से अस्थायी पुल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। दोनों देशों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने की बात सामने आई है।
'द काठमांडू पोस्ट' की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने मुस्तांग में कोराला सीमा चौकी के लिए 100 मीटर लंबे दो बेली पुल पहले ही भेज दिए हैं। नेपाल को उम्मीद है कि अस्थायी पुलों की मदद से बाढ़ से कटे महत्वपूर्ण मार्गों पर जल्द आवागमन बहाल किया जा सकेगा।
41 पुल पूरी तरह ध्वस्त
बाढ़ ने रसुवा और चितवन के बीच वाहनों के आवागमन के लिए बने 41 पुलों को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। चार अन्य पुलों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। इस कॉरिडोर में मौजूद कुल 63 पुलों में से अब केवल 18 पुल ही सुरक्षित बचे हैं।
सड़क और पुलों के पुनर्निर्माण पर भारी खर्च
नेपाल के सड़क विभाग ने सड़कों और पुलों को हुए नुकसान का शुरुआती अनुमान करीब 30 अरब नेपाली रुपये लगाया है। वहीं, इनका पुनर्निर्माण करने में करीब 50 अरब नेपाली रुपये खर्च होने का अनुमान है। बाढ़ के कारण कई महत्वपूर्ण सड़क संपर्क टूटने से प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री और जरूरी सेवाएं पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है।
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