नेपाल जलप्रलय: मकान, सड़कें और पुल बह गए, भारत-चीन ने बढ़ाया मदद का हाथ; बेली ब्रिज भेजे
काठमांडू। विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन से नेपाल के आधारभूत ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। उत्तरी और मध्य नेपाल में बड़ी संख्या में मकान, वाहन, सड़कें और पुल तबाह हो गए हैं। कई इलाकों में संपर्क व्यवस्था प्रभावित होने के कारण राहत और पुनर्निर्माण कार्य भी चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।
नेपाल अब आपदा प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों और पुलों को दोबारा तैयार करने में जुटा है। इसके लिए उसने पड़ोसी देशों भारत और चीन से मदद मांगी है। दोनों देशों ने नेपाल के अस्थायी पुल उपलब्ध कराने के अनुरोध पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।
रसुवा और चितवन के बीच बने 63 पुलों में से 41 पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, जबकि चार पुलों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। पुलों के टूटने से कई इलाकों का सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है और प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाना मुश्किल हो गया है।
चीन ने भेजे दो बेली ब्रिज
काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, चीन मुस्तांग जिले में कोरला सीमा चौकी के लिए दो बेली ब्रिज भेज चुका है। वहीं, भारत ने भी नेपाल को बेली ब्रिज उपलब्ध कराने की पेशकश की है। इन अस्थायी पुलों के जरिए आपदा प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन बहाल करने और राहत कार्यों को गति देने की कोशिश की जा रही है।
राहत शिविरों में बेघर लोगों का सहारा
बाढ़ की तबाही के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने राहत शिविरों में शरण ली है। काठमांडू के एक बौद्ध मठ में बनाए गए राहत शिविर में करीब 520 बेघर लोग रह रहे हैं। इन लोगों ने आपदा में अपना घर और जरूरी सामान खो दिया है।
शिविर में 12 वर्षीय त्सेरिंग की कहानी इस त्रासदी की भयावहता को बयां करती है। वह लगातार शिविर के दरवाजे की ओर देखता रहता है और अपने माता-पिता के लौटने का इंतजार कर रहा है। हालांकि, उसके माता-पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। प्राकृतिक आपदा ने कई परिवारों से उनके अपनों के साथ-साथ घर और जीवनभर की जमा पूंजी भी छीन ली है।
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