नेपाल जलप्रलय: अमेरिकी मदद में कटौती से राहत कार्यों पर असर, भारत ने भेजी 7वीं खेप; 35 टन सामग्री रवाना
नेपाल में अगस्त के अंत में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद राहत एवं बचाव कार्य अब भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं। नेपाल और पड़ोसी तिब्बत में इस आपदा से बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है। हजारों लोग प्रभावित हैं और बड़ी संख्या में लोगों के अब भी लापता होने की बात सामने आई है। इस मानवीय संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय सहायता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की विदेशी सहायता एजेंसी यूएसएआईडी के बंद होने का असर नेपाल में काम कर रहे कई अमेरिकी फंड से जुड़े गैर-सरकारी संगठनों पर पड़ा है। ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल की शुरुआत में यूएसएआईडी को बंद करने का फैसला लिया था। इसके बाद नेपाल में कुछ संगठनों को अपने कार्यक्रम रोकने पड़े, जिससे आपदा के समय तत्काल राहत सामग्री और अन्य संसाधन जुटाने की उनकी क्षमता प्रभावित हुई।
वहीं, भारत ने नेपाल के लिए मानवीय सहायता जारी रखी है। बुधवार को भारतीय वायुसेना के विशेष सी-17 परिवहन विमान से राहत सामग्री की सातवीं खेप नेपाल भेजी गई। इस खेप में करीब 35 टन सामान और जरूरी उपकरण शामिल हैं। भारत इससे पहले भी बाढ़ प्रभावित नेपाल के लिए राहत सामग्री और आवश्यक दवाओं की कई खेप भेज चुका है।
नेपाल में मौजूदा हालात की तुलना वर्ष 2015 के विनाशकारी भूकंप के बाद मिली अंतरराष्ट्रीय सहायता से भी की जा रही है। उस समय अमेरिका ने भूकंप के 48 घंटे के भीतर 128 सदस्यीय विशेषज्ञ आपदा प्रतिक्रिया दल नेपाल भेजा था और तत्काल करीब एक करोड़ डॉलर की मानवीय सहायता का ऐलान किया था।
मौजूदा आपदा के बीच अमेरिकी सहायता तंत्र की अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वहीं भारत की ओर से लगातार भेजी जा रही राहत सामग्री नेपाल में जारी मानवीय सहायता प्रयासों में अहम भूमिका निभा रही है।
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