ईरान का दावा- ट्रंप और पेजेशकियन करेंगे शांति समझौते पर हस्ताक्षर, कूटनीतिक रिश्तों में आ सकता है नया मोड़
तेहरान/वॉशिंगटन (आरएनआई) अमेरिका और ईरान के बीच वर्षों से चले आ रहे तनाव को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति के संकेत मिले हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय ने दावा किया है कि प्रस्तावित शांति समझौते पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन स्वयं हस्ताक्षर कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो यह दोनों देशों के संबंधों में एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण मोड़ माना जाएगा।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते पर शुक्रवार को औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए जाने की संभावना है। सरकारी मीडिया के मुताबिक, दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय स्थिरता, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनने की दिशा में सकारात्मक प्रगति हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता साकार होता है तो वर्ष 1980 में तेहरान स्थित अमेरिकी दूतावास बंधक संकट के बाद से दोनों देशों के बीच चली आ रही कटुता को कम करने की दिशा में यह सबसे बड़ा कदम साबित हो सकता है। उसी संकट के बाद अमेरिका और ईरान के राजनयिक संबंध समाप्त हो गए थे।
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने सत्ता में आने के बाद पश्चिमी देशों के साथ संबंध सुधारने की वकालत की थी। हालांकि, देश के भीतर बदलते राजनीतिक समीकरणों और क्षेत्रीय संघर्षों के चलते उनकी भूमिका को लेकर लगातार चर्चाएं होती रही हैं। इसके बावजूद मौजूदा वार्ता को उनकी सरकार की महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक हस्ताक्षर समारोह की तारीख और अपनी उपस्थिति की औपचारिक पुष्टि नहीं की है। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि किसी भी समझौते के बारे में अंतिम क्षण तक पूरी तरह निश्चित नहीं हुआ जा सकता। उन्होंने इतना जरूर कहा कि स्थिति जल्द स्पष्ट हो जाएगी। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि वह हस्ताक्षर समारोह में शामिल हो सकते हैं, लेकिन इस संबंध में अंतिम निर्णय अभी नहीं लिया गया है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब संभावित समझौते पर टिकी हैं, क्योंकि इससे न केवल अमेरिका और ईरान के संबंधों में सुधार की संभावना बनेगी, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में स्थिरता और शांति प्रयासों को भी नई दिशा मिल सकती है।
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