इंदौर ईवी हादसे के बाद उठे बड़े सवाल: तीन साल में 26 आग की घटनाएं, फिर भी सुरक्षा पर चिंता क्यों बरकरार?
मध्य प्रदेश के इंदौर में चार्जिंग के दौरान एक इलेक्ट्रिक वाहन में लगी आग ने भयावह रूप ले लिया और देखते ही देखते पूरे तीन मंजिला मकान को अपनी चपेट में ले लिया। इस दर्दनाक हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। बंगाली चौराहे के पास हुई इस घटना ने पूरे देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
यह पहली बार नहीं है जब ईवी में आग लगने की घटना सामने आई हो। पिछले कुछ वर्षों में देश के अलग-अलग हिस्सों से इलेक्ट्रिक कारों और दोपहिया वाहनों में आग लगने की खबरें आती रही हैं, जिनमें जान-माल का नुकसान भी हुआ है। हालांकि, आधिकारिक आंकड़े कुछ अलग तस्वीर पेश करते हैं।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के ई-डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट (eDAR) पोर्टल के अनुसार, वर्ष 2023 से 2025 के बीच भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़े कुल 23,865 सड़क हादसे दर्ज किए गए। इनमें से केवल 26 मामलों में ही आग लगने की पुष्टि हुई है। यानी कुल घटनाओं की तुलना में आग लगने के मामले बेहद कम हैं, लेकिन जब भी ऐसी घटना होती है, उसके परिणाम बेहद गंभीर होते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, ईवी में आग लगने की मुख्य वजह बैटरी से जुड़ी समस्याएं होती हैं। लिथियम-आयन बैटरी में ओवरहीटिंग, शॉर्ट सर्किट, मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट या गलत चार्जिंग तरीके जैसी स्थितियां आग का कारण बन सकती हैं। खासकर गर्मी के मौसम में तापमान बढ़ने के कारण बैटरी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे जोखिम और बढ़ जाता है।
इंदौर की घटना के बाद यह सवाल और भी अहम हो गया है कि क्या ईवी के इस्तेमाल के साथ सुरक्षा मानकों का पालन पर्याप्त रूप से हो रहा है। सरकार और संबंधित एजेंसियां समय-समय पर जांच और दिशा-निर्देश जारी करती रही हैं, लेकिन तेजी से बढ़ते ईवी उपयोग के बीच सख्त निगरानी और जागरूकता की जरूरत अब पहले से कहीं ज्यादा महसूस की जा रही है।
कुल मिलाकर, आंकड़े भले ही सीमित जोखिम दिखाते हों, लेकिन इंदौर जैसे हादसे यह संकेत देते हैं कि ईवी सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही भारी पड़ सकती है।
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