आदिनाथ भगवान को हुआ केवल्य ज्ञान, मुनि श्री सुधासागर जी ने बताया आत्मकल्याण का मार्ग

Sunday, June 21, 2026 - 21:58
Updated: 2 months ago
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आदिनाथ भगवान को हुआ केवल्य ज्ञान, मुनि श्री सुधासागर जी ने बताया आत्मकल्याण का मार्ग

गुना (आरएनआई) समयगदृष्टि जीव स्वयं को देव-शास्त्र-गुरु के चरणों में समर्पित कर देता है और स्वयं की निंदा करके अपना जीवन पवित्र बना लेता है वह नकारात्मकता को दूर करके क्रोध,क्षमा को धारण करता है और एक दिन मोक्ष को प्राप्त हो जाता है। उन्होंने कहा जो जैसा बोता है वह बैसा ही काटता है। धर्म पंचम काल के अंत तक चलेगा और चलता ही रहेगा यह समाप्त नहीं होगा यह विचार कर तीर्थंकर मुनि ऋषभ सागर जी महाराज ने आहार चर्या का प्रवर्तन किया और 218 दिन बाद राजा श्रेयांस के हाथों से इच्छुरस का आहार लिया है मुनि आहारचर्या का प्रवर्तन किया है उन्होंने कहा समयकदृष्टि जीव जीवन में दूसरों के भले की सोचता है और विचार करता है सभी जीव सुखी हो। अच्छा व्यक्ति अच्छा सोचता है और बुरा व्यक्ति बुरा सोचता है। जो जैसा सोचेगा वह बैसा ही पायेगा।

गुना। आज तीर्थंकर आदि सागर जी महाराज को केवल्यज्ञान की प्राप्ति हुई इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुयें आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य जगत पूज्य मुनि पुगव श्री सुधासागर जी महाराज ने व्यक्त किये है।

उन्होंने कहा भगवान को केवल्य ज्ञान होते ही रिद्धियां प्राप्त हो जाती है और वह आत्मा के स्वरूप को जानते है और समवसरण के सभी जीवो की धर्म का उपदेश देते है। उनके केवल्य ज्ञान में झलकने लगता है आत्मा शाश्वत है, अविनाशी है यह न तों जन्म लेता है और न मरता है।

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